“सरदार पटेल कौन थे?”
“वे देश के पहले उपप्रधानमंत्री और पहले गृहमंत्री थे.”
“और बताओ.”
“वे बीजेपी के कद्दावर नेता थे.”
“बीजेपी के नेता? वे तो कांग्रेसी थे। बीजेपी तो 1980 में बनी.”
“इतिहास में झूठ पढ़ाया गया है। मैं तुम्हें अभी एक WhatsApp फॉरवर्ड करता हूं. पढ़ना.”
“WhatsApp पर तुम्हें इतना भरोसा है?”
“क्यों नहीं होगा। लॉजिक है लॉजिक”
“कैसा लॉजिक?”
“देखो. वे भी उपप्रधानमंत्री थे और आडवाणी जी भी उपप्रधानमंत्री बने। वे भी गृहमंत्री थे और आडवाणी जी भी बने।”
“तो?”
“तो क्या? आडवाणी बीजेपी के हैं, तो पटेल कहां के हुए?”
“सुनो, राम मंदिर बनना ही चाहिए।”
“अरे, आपको क्या हुआ? आप तो पके हुए समाजवादी थे?”
“वो तो अभी भी हूं.”
“फिर, राम मंदिर की रट क्यों लगा रहे? ये तो आपका राजनीतिक एजेंडा नहीं है.”
“देखो, बने या न बने, इससे मुझे कोई फर्क़ नहीं पड़ता.”
“फिर?”
“मेरा काम है बोलते रहना.”
“जब फर्क़ ही नहीं पड़ता तो बोल क्यों रहे?”
“क्योंकि मैं अजय देवगन का फैन हूं. उन्होंने सबको ज़ुबां केसरी बोलने को कहा है.”
Courtesy: Dilip Khan
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