उसके अलावा कुछ भी नहीं – राजेन्द्र राजन

Arjuna

चिड़िया की आंख

शुरु से कहा जाता है

सिर्फ चिड़िया की आंख देखो

उसके अलावा कुछ भी नहीं

तभी तुम भेद सकोगे अपना लक्ष्य

सबके सब लक्ष्य भेदना चाहते हैं

इसलिए वे चिड़िया की आंख के सिवा

बाकी हर चीज के प्रति

अंधे होना सीख रहे हैं

इस लक्ष्यवादिता से मुझे डर लगता है

मैं चाहता हूं

लोगों को ज्यादा से ज्यादा चीजें दिखाई दें ।

– राजेन्द्र राजन

One thought on “उसके अलावा कुछ भी नहीं – राजेन्द्र राजन

  1. बहुत खूब…..खूबसूरत कविता ………लक्ष्य कि यही दौड तो हमें अंधा बना रही है
    दो अदद आँखे होते हुए भी एक बंद रखना सिखा रही है
    देखो महज उतना जितना तुम्हारे स्वार्थ कि पूर्ति करे ..
    सड़क पर सुम तोडती महिला भीख मांगते बच्चे और ठेला ढोते मजदूर के लिए पीढा संजोये आँख को मूंदे रखो और अपने लक्ष्य पर ध्यान रखो

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