चिड़िया की आंख
शुरु से कहा जाता है
सिर्फ चिड़िया की आंख देखो
उसके अलावा कुछ भी नहीं
तभी तुम भेद सकोगे अपना लक्ष्य
सबके सब लक्ष्य भेदना चाहते हैं
इसलिए वे चिड़िया की आंख के सिवा
बाकी हर चीज के प्रति
अंधे होना सीख रहे हैं
इस लक्ष्यवादिता से मुझे डर लगता है
मैं चाहता हूं
लोगों को ज्यादा से ज्यादा चीजें दिखाई दें ।
– राजेन्द्र राजन

बहुत खूब…..खूबसूरत कविता ………लक्ष्य कि यही दौड तो हमें अंधा बना रही है
दो अदद आँखे होते हुए भी एक बंद रखना सिखा रही है
देखो महज उतना जितना तुम्हारे स्वार्थ कि पूर्ति करे ..
सड़क पर सुम तोडती महिला भीख मांगते बच्चे और ठेला ढोते मजदूर के लिए पीढा संजोये आँख को मूंदे रखो और अपने लक्ष्य पर ध्यान रखो