यही वे हाथ हैं जो इम्तियाज़ हैं – नाचीज़

David Cuttingham   कुछ हाथ हैं सुर्ख सफेद कुछ हाथ दराज हैं दस्‍त दराज हैं कुछ हाथ हैं गंदे मटमैले कुछ हाथ फराज हैं, सरफराज हैं कुछ हाथ हैं खून से रंगे हुए कुछ हाथ हैं अंधेरा बुन रहे कुछ हाथ हैं उनके साथ हैं कुछ हाथ हैं अंधेरा सहेज रहे कुछ हाथ हैं उनके पासबान हैं कुछ और भी हाथ हैं अंधेरे के ये … Continue reading यही वे हाथ हैं जो इम्तियाज़ हैं – नाचीज़

आग जलती रहे- दुष्यंत कुमार (Dushyant Kumar)

    एक तीखी आँच ने इस जन्म का हर पल छुआ, आता हुआ दिन छुआ हाथों से गुजरता कल छुआ हर बीज, अँकुआ, पेड़-पौधा, फूल-पत्ती, फल छुआ जो मुझे छुने चली हर उस हवा का आँचल छुआ … प्रहर कोई भी नहीं बीता अछुता आग के संपर्क से दिवस, मासों और वर्षों के कड़ाहों में मैं उबलता रहा पानी-सा परे हर तर्क से एक … Continue reading आग जलती रहे- दुष्यंत कुमार (Dushyant Kumar)