एक और शहादत – कॅंवल भारती

इसमें सन्देह नहीं कि इलावरसन ने आत्महत्या नहीं की, बल्कि उसकी हत्या की गयी है। कोई भी व्यक्ति एटीएम से रुपये निकाल कर मोटरसाइकल से आत्महत्या करने नहीं जायेगा। वह आत्महत्या कर ही नहीं सकता था, क्योंकि उसने प्रेम किया था और दिव्या के साथ एक नया जीवन जीने के लिये संघर्ष किया था। चूॅंकि प्रेम जाति और धर्म के बन्धनों की परवाह नहीं करता … Continue reading एक और शहादत – कॅंवल भारती

They killed your love Ilavarasan, They killed you Ilavarasan!

Caste hegemony to the fore B. Kolappan The tragic end to the love story of Divya and Ilavarasan has highlighted the hegemony of caste in private relationships in Tamil Nadu, especially if it involves a Dalit. At the time of their marriage — August 2012 — Divya was a nursing student, and Ilavarasan a Tamil Nadu Police Department recruit, waiting for his appointment. A marriage … Continue reading They killed your love Ilavarasan, They killed you Ilavarasan!

मगहर का ‘दलित बचपन’ विशेषांक – कँवल भारती (Kanwal Bharti)

कँवल भारती प्रतिरोध, परिवर्तन और प्रगति की अनियतकालीन पत्रिका ‘मगहर’ का 432 पृष्ठों का ‘दलित बचपन’ विशेषांक दो कारणों से अत्यन्त महत्वपूर्ण है. एक, इसको पढ़ना सर्वथा नये अनुभवों से गुजरना है और दो, यह दलित साहित्य में संभवतः पहला काम है, जो मुकेश मानस की सम्पादकीय क्षमता से दस्तावेजी बन गया है. इस समय हिन्दी में लगभग पचास से भी ज्यादा पत्र-पत्रिकाओं का प्रकाशन … Continue reading मगहर का ‘दलित बचपन’ विशेषांक – कँवल भारती (Kanwal Bharti)

सवाल प्रतिनिधित्व का है, आरक्षण का नहीं – कँवल भारती (Kanwal Bharti)

नामवर सिंह ने गत दिनों दस किताबों का विमोचन किया। उनमें एक किताब दलित लेखक अजय नावरिया की थी। दसों किताबें सवर्णों की होनी चाहिए थीं। उनमें एक दलित कैसे घुस गया? प्रकाशक की यह मजाल कि वह सवर्णों की जमात में दलित को खड़ा कर दे! बस नामवर सिंह का पारा चढ़ गया। वह जितना गरिया सकते थे, उन्होंने दलित को गरियाया। फिर उन्होंने … Continue reading सवाल प्रतिनिधित्व का है, आरक्षण का नहीं – कँवल भारती (Kanwal Bharti)