दिल्लियाँ चुप रहने के लिए ही होती हैं हमेशा – शलभ श्रीराम सिंह
हाथी की नंगी पीठ पर घुमाया गया दाराशिकोह को गली-गलीऔर दिल्ली चुप रही लोहू की नदी में खड़ामुस्कुराता रहा नादिर शाहऔर दिल्ली चुप रहीलाल किले के सामने बन्दा बैरागी के मुँह में डाला गयाताज़ा लहू से लबरेज़ अपने बेटे का कलेजाऔर दिल्ली चुप रही गिरफ़्तार कर लिया गयाबहादुरशाह जफ़र कोऔर दिल्ली चुप रहीदफ़ा हो गए मीर गालिबऔर दिल्ली चुप रही दिल्लियाँ चुप रहने के … Continue reading दिल्लियाँ चुप रहने के लिए ही होती हैं हमेशा – शलभ श्रीराम सिंह