Feminist Diary 5 – Manisha Pandey
ना-ना। तुम क्या सोचते हो, मैं तुमसे बहुत नाराज हूं या तुम्हारे लिए दिल में अरबों टन नफरत पाले बैठी हूं। अरे, बिलकुल नहीं। बल्कि अगर मैं कहूं तो शायद तुम्हें यकीन न हो कि यदि मैं दुनिया में किसी की सबसे ज्यादा शुक्रगुजार हूं तो तुम्हारी ही। तुम्हीं तो हो, जिसने उस कच्ची उमर में इतना लतियाया कि ताउम्र के लिए मुझे तुम्हारी … Continue reading Feminist Diary 5 – Manisha Pandey