ऐ भाय कोई है – रवीश कुमार (Ravish Kumar)

दिलीप साब, गंगा जमुना वाले नहीं आप मेरे लिए मशाल वाले दिलीप साब हैं और हमेशा रहेंगे । मुंबई की उस रात जब आप अपनी पत्नी सुधा की जान बचाने के लिए चीख़ रहे थे तब मैं पटना के सिनेमा हाल में बैठा उस अनजान शहर की ख़ौफ़नाक चुप्पी से सहम गया था । उस रात आप हर आती जाती मोटर के पीछे भाग रहे … Continue reading ऐ भाय कोई है – रवीश कुमार (Ravish Kumar)

स्वर्ण युग का भस्मासुर – Ravish Kumar

राजनीति आपकी कमज़ोर स्मृतियों के सहारे ऐसे मिथक की रचना करती है जिसका कोई व्यावहारिक आधार नहीं होता है। हम हर पंद्रह अगस्त और छब्बीस जनवरी को जहां डाल डाल पर सोने की चिड़िया करती है बसेरा, वो भारत देश है मेरा, सुन कर भावविभोर होते रहते हैं। पर एक पल के लिए सोचते तो होंगे कि क्या सचमुच ऐसा कोई काल रहा होगा जब … Continue reading स्वर्ण युग का भस्मासुर – Ravish Kumar