संसद में सेंगोल और जंतर-मंतर पर लाठी | New Parliament and the Wrestlers’ Protest
Courtesy: Ravish Kumar Official Continue reading संसद में सेंगोल और जंतर-मंतर पर लाठी | New Parliament and the Wrestlers’ Protest
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सुप्रीम कोर्ट के सवाल और कपिल सिब्बल की दलील के सामने आज सोलिसिटस जनरल तुषार मेहता सिर्फ एक ही बिन्दु के सहारे टिके नज़र आए कि इसकी सुनवाई हाईकोर्ट में हो रही है तो वहीं होनी चाहिए लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट में सुनवाई की तारीख को लेकर ही गंभीर सवाल उठा दिए। UPDATED: 1 सितम्बर, 2022 11:08 PM नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में आज … Continue reading तीस्ता को ज़मानत न मिलने पर सुप्रीम कोर्ट के सवाल -Ravish Kumar
बड़ी शख्सियतों की परछाइयों तक से मुझे डर लगता है या खुलकर कहूं तो एलर्जी है। अनगिनत नामचीन लोगो से टकराने के बावजूद कभी निजी पीआर में नहीं पड़ा। मेरे व्यकित्व की अपनी सीमाएं, मेरा इगो, आप जो भी मानें। ऐसे में मुझे अपने किसी समकालीन या हमपेशा आदमी पर लेख लिखना पड़े तो ये वाकई बहुत कष्टप्रद है। कष्ट के साथ थोड़ी सी … Continue reading रवीश बड़े नहीं ये वक्त बहुत छोटा है- Rakesh Kayasth
What did NDTV India report this week? The Information and Broadcasting ministry, according to PTI, will now ask the channel NDTV India to be taken off air for a day on the 9th of November. The I & B Ministry’s decision would be the first ever order against a broadcaster over its coverage of terrorist attacks. We at Hillele.org looked at the stories NDTV India … Continue reading “NDTV India This Week”- A Look @ the stories before I & B recommended 1 day ban!
लक्ष्मी आई है, बधाई हो पता नहीं क्यों इस बार अच्छा नहीं लगा। जब भी किसी ने कहा कि लक्ष्मी आई है तो मन उदास हो गया। समझने की कोशिश कर रहा था कि क्यों कहा जा रहा है? बेटी आई है। लक्ष्मी कैसे आ गई? क्या ये सात्वंना में कहा जा रहा है? बेटा आता है तो क्या कहा जाता है? बेटा लक्ष्मी है … Continue reading लक्ष्मी आई है, बधाई हो – Ravish Kumar
प्रिय जेल, चौंक गई ! क्या जेल को प्रिय नहीं पुकारा जा सकता । जब हम प्रेम में गिरफ़्तार हो सकते हैं तो जेल से प्रेम क्यों नहीं कर सकते । लोगों ने जेल से किताबें लिखीं, जेल में रहते हुए पुत्री के नाम पत्र लिखे लेकिन किसी ने जेल को पत्र नहीं लिखा । दुनिया में जेल को प्रिय पुकारने वाला प्रथम पुरुष मैं … Continue reading जेल के नाम रवीश कुमार का एक प्रेम पत्र
फासीवाद की खासियत है कि हर विरोध करने वाले को ही नहीं, हर तर्क करने वाले को ख़तरा समझा जाता है। उसका दमन होता है और इसकी शुरुआत धमकी, गाली-गलौज और फिर मिथ्या प्रचार या छवि खराब करने से होती है। फासीवादी शासक जानते हैं कि छवि खराब करना, हत्या करने से ज़्यादा प्रभावी और आसान तरीका है। लम्बे समय से टीवी पत्रकार रवीश कुमार … Continue reading मेरे सवाल आप से हैं, आप चुप क्यों हैं? – आपके नाम रवीश की चिट्ठी
माननीय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह जी, “वो जो गहरे नीले कुर्ते में है न, हां! वही जो अभी बेसुध सी पड़ी है, ये..ये जो अब उठकर दहाड़ मार रही है। संभाल नहीं पा रही है खुद को। ये जो उठकर फिर गिर गई है।” आग की उठती लपटों के कारण उसे देख तो नहीं पाया पर कान के पास कुछ आवाज़ें पत्रकार अक्षय सिंह के बारे … Continue reading पत्रकार अक्षय सिंह की मौत पर शिवराज सिंह के नाम रवीश कुमार की खुली चिट्ठी