आपके मर्यादापुरुषोत्तम आपको मुबारक – Dilip Mandal

महान शूद्र विद्वान और तपस्वी शंबूक की हत्या करने वाला मेरे लिए मर्यादापुरुषोत्तम नहीं है। अगर वह आपका मर्यादापुरुषोत्तम है, तो यह आपकी आज़ादी है। मुझे अपना मर्यादापुरुषोत्तम चुनने की आज़ादी संविधान देता है। देखें अनुच्छेद 15 और 25. इसी आज़ादी के तहत शंबूक वध की निंदा करने वाली सैकड़ों किताबें छपी हैं, नाटक लिखे गए हैं, कविताएँ लिखी गई हैं, लिखी जा रही हैं। … Continue reading आपके मर्यादापुरुषोत्तम आपको मुबारक – Dilip Mandal

राम की राजधानी से बापू के संदेश -कृष्ण प्रताप सिंह

अब इसे विडम्बना कहा जाये, संयोग या कुछ और, लेकिन जिन राम के राज के अपने सपने को साकार करने के लिए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने यावत्जीवन कुछ उठा नहीं रखा, उनकी राजधानी या कि जन्मभूमि अयोध्या वे सिर्फ दो बार पहुंच सके। अलबत्ता, अपने संदेशों से इन दोनों ही यात्राओं को महत्वपूर्ण बनाने में उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी। 10 फरवरी, 1921 को उनकी … Continue reading राम की राजधानी से बापू के संदेश -कृष्ण प्रताप सिंह

राम की शक्तिपूजा में पूरा सामन्तवाद है – कॅंवल भारती

बुद्ध ने अपने भिक्षुओं को हिदायत दी थी कि वे कभी भी उनके वचनों को छांदस (उस समय की सामन्ती भाषा) में न लिखें। निराला ने ‘राम की शक्ति पूजा’ छांदस हिन्दी (सामन्ती भाषा) में क्यों लिखी? उन्होंने नागार्जुन की तरह जनभाषा में कविता की रचना क्यों नहीं की? क्या इससे यह साबित नहीं होता कि निराला के सारे संस्कार सामन्ती थे? भाषा से ही … Continue reading राम की शक्तिपूजा में पूरा सामन्तवाद है – कॅंवल भारती