ओ राष्ट्रवादी – Himanshu Kumar

अगर राष्ट्र ना होता तो तू भी मेरी तरह अपनी मेहनत की ही खाता मैं करता हूं मेहनत पर तिजोरी भरती है तेरी मैं तेरी गर्दन पकड़ कर अपनी मेहनत की पूरी कीमत वसूल लेता लेकिन हमेशा पुलिस तुझे बचा लेती है अगर पुलिस ना होती फिर देखता तू कैसे अमीर बन पाता इसलिये तू पुलिस के गुणगान करता है ओ राष्ट्रवादी मेरी ज़मीन पर … Continue reading ओ राष्ट्रवादी – Himanshu Kumar