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उसमें बस एक दिक्कत थी। अंकल सरकारी नौकरी में थे…- Mayank Saxena

एक पुराने चावल (70+ अंकल) ने व्हॉट्सएप ग्रुप पर मास मैसेज किया कि किस तरह सरकारी कर्मचारी निकम्मे और चोर हैं। इसीलिए देश का बेड़ागर्क होता है, ये नौकरी की जगह हरामखोरी करते हैं और इसलिए सरकारी काम ठीक से नहीं होते। भ्रष्टाचार भी यही लोग करते हैं और इसीलिए देश की अर्थव्यवस्था का नाश हो रहा है। फिर अंकल ने बताया कि कैसे इसीलिए … Continue reading उसमें बस एक दिक्कत थी। अंकल सरकारी नौकरी में थे…- Mayank Saxena

सार्वजनिक संस्थाओं को बेचने पर आमादा सरकारों से पूछा जाना चाहिए कि वो हैं किस लिए ? सिर्फ दलाली खाने के लिए? – Rakesh Kayasth

सरकारी तंत्र यानी नकारापन। प्राइवेट सेक्टर यानी अच्छी सर्विस और एकांउटिबिलिटी। यह एक आम धारणा है, जो लगभग हर भारतीय के मन में बैठी हुई है या यूं कहे बैठा दी गई है। लेकिन यह धारणा हर दिन खंडित होती है। किस तरह उसकी एक छोटी केस स्टडी आपके सामने रख रहा हूं। मेरे पड़ोसी ने एक ऐसे प्राइवेट बैंक से होम लोन लिया था, … Continue reading सार्वजनिक संस्थाओं को बेचने पर आमादा सरकारों से पूछा जाना चाहिए कि वो हैं किस लिए ? सिर्फ दलाली खाने के लिए? – Rakesh Kayasth

Voices raised for public schools in India

Nisha Thapliyal discusses the background to We Shall Fight, We Shall Win, a new documentary detailing the struggle against education privatization in India.   Public education activists rally in Bhopal, Madhya Pradesh (Satyashodhak Yugandhar) THE ALL India Forum for the Right to Education (AIFRTE) has just released a short documentary about its struggle against the privatization of education in India. The film, titled We Shall … Continue reading Voices raised for public schools in India