ओ राष्ट्रवादी – Himanshu Kumar

अगर राष्ट्र ना होता तो तू भी मेरी तरह अपनी मेहनत की ही खाता मैं करता हूं मेहनत पर तिजोरी भरती है तेरी मैं तेरी गर्दन पकड़ कर अपनी मेहनत की पूरी कीमत वसूल लेता लेकिन हमेशा पुलिस तुझे बचा लेती है अगर पुलिस ना होती फिर देखता तू कैसे अमीर बन पाता इसलिये तू पुलिस के गुणगान करता है ओ राष्ट्रवादी मेरी ज़मीन पर … Continue reading ओ राष्ट्रवादी – Himanshu Kumar

झंडा और डंडा: वुसतुल्लाह खान

  क्या आपने तिरंगा ग़ौर से देखा है, ज़रूर देखा होगा. लेकिन कभी आप ने ये सोचने की तकलीफ़ उठाई कि कपड़े के तीन विभिन्न पट्टियों को क्यों जोड़ा गया था और फिर बीच में अशोक चक्र क्यों बना दिया गया. जब पिंगली वेंकैया साहेब ने ये तिरंगा डिज़ाइन किया तो उन्होंने नारंगी पट्टी यह सोचकर ड्राइंग बोर्ड पर बिछाई होगी कि भारत का हर … Continue reading झंडा और डंडा: वुसतुल्लाह खान

और आप कहेंगे सिपाहियों से कि ये कपडा ही राष्ट्र है – Himanshu Kumar

आपने एक ज़मीन के टुकड़े की एक सीमा बनाई उस ज़मीन के टुकड़े को राष्ट्र कहा इसमें रहने वाले सारे लोग अपने आप अब उस राष्ट्र के नागरिक हो गये अब इन सब लोगों के क्या अधिकार होंगे ?इनमे से कौन जन्म से ही सम्म्मानित माना जायेगा और कौन जन्म से ही अपमानित माना जाएगा ? कौन काट सकेगा किसके बच्चों को तलवारों को ?और … Continue reading और आप कहेंगे सिपाहियों से कि ये कपडा ही राष्ट्र है – Himanshu Kumar