मेरे पापा, मेरे हीरो (व्यंग्य) – Mayank Saxena

      अंततः राजू और सुष मैच खेलने तो आ गए…लेकिन इस बार भी उनको न तो ओपनिंग मिली…और न ही कैप्टेन बनाया गया…हालांकि वो ज़िद करते रहे…और कई बार कहा कि जाओ हम नहीं खेल रहे…हम नहीं खेल रहे…लेकिन ये तो बुढ़ापे में भी कैप्टेन बनने की ज़िद कर रहे लाला भइया भी एक साल से ज़्यादा से कह रहे थे…फिर उधर से … Continue reading मेरे पापा, मेरे हीरो (व्यंग्य) – Mayank Saxena

श्री लाल शुक्ल…ये आपको समर्पित है – Mayank Saxena

(राग दरबारी के अंश में थोड़ा शब्दों का हेर-फेर कर के ये अंश लिखा गया है…राग दरबारी के प्रेमी या पाठक ही पढ़ें…क्योंकि अन्य के लिए समझना थोड़ा मुश्किल होगा…बुरा न मानें-दिल पर न लें…लेना है तो शांति से काम लें…) उन्होंने लोगों के दो वर्ग बना रखे थेः राष्ट्रवादी और सेक्युलर। वे राष्ट्रवादियों की प्रकट रुप से और सेक्युलरों की गुप्त रुप से सहायता … Continue reading श्री लाल शुक्ल…ये आपको समर्पित है – Mayank Saxena

कंकाल – Mayank Saxena

एक पूरी पीढ़ी के कंकालों पर रखी जाती है नींव आने वाली किसी पीढ़ी के उत्तराधिकार की नींव नींव मज़बूत होनी चाहिए गरीबों से मज़बूत हड्डियां और कंकाल किसके हो सकते हैं भला… सिंहासन खाली करो कि जनता आती है ये सच नहीं था सच था सिर्फ सिंहासन जनता का आना सपना था और हां… कंकाल…और पाए सपने देखते हैं कहीं… Continue reading कंकाल – Mayank Saxena

बाज़ार पहले आपको खरीदता है, फिर नीलाम कर देता है… – Mayank Saxena

                आईबीएन 7 और सीएनएन आईबीएन यानी कि नेटवर्क 18 के न्यूज़ मीडिया वेंचर्स के लगभग 300 कर्मचारियों की छंटनी को जो लोग विदाई कह रहे हैं, उनको पहले अपनी भाषा पर काम करना होगा कि दरअसल ये विदाई है या नहीं, क्योंकि विदाई की एक रस्म होती है जो बाज़ार की इस रस्म से काफी अलग होती … Continue reading बाज़ार पहले आपको खरीदता है, फिर नीलाम कर देता है… – Mayank Saxena

टीम बूँद

इसे पढ़िये और समझिये कि क्यूँ आपको उत्तराखण्ड में होना चाहिए उत्तराखंड में आई प्राकृतिक आपदा से निपटने में स्थानीय सरकार और विपक्ष पूरी तरह से विफल रही है. सरकार ने आपदा में बचे हुये पर्यटकों को बाहर निकालकर अपने कर्तव्य की इतिश्री समझ ली है. विपक्ष वहीं तक गया, जहाँ तक आरामदायक सड्के हैं या हेलीकाप्टर उतरने की व्यवस्था है. इन हालातों में जब … Continue reading टीम बूँद

साली मुफ्तखोर – Mayank Saxena

गांव गए हो कभी नुक्कड़ पर छप्पर के नीचे सुबह से गांजा लगा कर जुआ खेलते 9 पुरुष आपस में बात करते हैं अपनी औरतों से बेहद परेशान कहते हैं कल साली को खूब मारा आज कल हरामखोर हो गई है काम में मन नहीं लगता है साली मुफ्तखोर दो पड़े हैं देखो कैसे सुबह से लगी है खेत में काम पर अब देखो मुन्ना … Continue reading साली मुफ्तखोर – Mayank Saxena

कुछ मकान बूढ़े हो जाते हैं – Mayank Saxena

कुछ मकान बूढ़े हो जाते हैं जब तो दरकने लगते हैं दरकते मकानों को रास नहीं आती मरम्मत पुताई लेकिन वो करवाता जाता है ये सब कुछ सिर्फ इसलिए कि बचा रहे वो देता रहे लोगों को आसरा मानते रहें लोग उसका अहसान बने रहें शरण में कहते रहें देखो असल तो पुराना ही है नया तो बेकार है कभी लगता है समाज… कहीं कोई … Continue reading कुछ मकान बूढ़े हो जाते हैं – Mayank Saxena

धर्म की जय हो – Mayank Saxena

रक्तों के सागर में स्नान कर आया है खा कर मानव अंतड़ियां नाखूनों में देखो अभी तक भरा है मज्जा का गूदा आंखों से बह रही है हिंसा…और हिंसा उसके नाम अलग अलग हैं उसका तरीका एक ही धर्म की जय हो अधर्म का नाश हो… Continue reading धर्म की जय हो – Mayank Saxena

तुम सिर्फ गण के कवि हो – Mayank Saxena

मैंने कहा मैं कवि हूं बांध दूंगा अपनी कविता में तुम्हें रोक दूंगा तुम्हारी उत्श्रृंखलता को वो बोला मैं कांवड़िया हूं तोड़ दूंगा तुम्हारी कलम छीन कर जला दूंगा सारे कागज़ हड्डियां छितरा दूंगा फिर लिखना कविता तुम सिर्फ गण के कवि हो और मैं शिव का गण हूं… हर हर महादेव…. Continue reading तुम सिर्फ गण के कवि हो – Mayank Saxena

अब मदद नहीं चाहिए शिवा को – Mayank Saxena

Uttarakhand Diary 18th July, 2013 कुछ रोज़ पहले हम ने फेसबुक पर शिवा यानी कि शिव प्रसाद की तस्वीरें शेयर की थीं…शिवा का घर बाहरी दुनिया से कट चुके चंद्रपुरी इलाके में है…घर में सिर्फ एक कमरा है, जिसके ऊपर एक रिसती हुई छत है…बेहद गरीब शिव की रीढ़ की हड्डी डेढ़ साल पहले टूटी थी…गरीबी ने इलाज का मौका नहीं दिया…डेढ़ साल तक बिस्तर … Continue reading अब मदद नहीं चाहिए शिवा को – Mayank Saxena