मेरे पापा, मेरे हीरो (व्यंग्य) – Mayank Saxena
अंततः राजू और सुष मैच खेलने तो आ गए…लेकिन इस बार भी उनको न तो ओपनिंग मिली…और न ही कैप्टेन बनाया गया…हालांकि वो ज़िद करते रहे…और कई बार कहा कि जाओ हम नहीं खेल रहे…हम नहीं खेल रहे…लेकिन ये तो बुढ़ापे में भी कैप्टेन बनने की ज़िद कर रहे लाला भइया भी एक साल से ज़्यादा से कह रहे थे…फिर उधर से … Continue reading मेरे पापा, मेरे हीरो (व्यंग्य) – Mayank Saxena