बेटियों से मुँह चुराते प्रधानमंत्री पर एक सांस्कृतिक चिट्ठा -कश्यप किशोर मिश्र

मर्दानगी क्या होती है ? यह जनाना या स्त्रैण से कितनी अलग होती है ? हाँलाकि यह एक सामाजिक सवाल है पर इसके राजनीतिक जवाब की तलाश करें तो तलाश की सुई भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर मुड़ जाती है । राजनीतिक मर्दवाद को सामाजिक मर्दवाद की मर्यादा बना देने का उदाहरण इस मुल्क नें जय गंगा मईया को नमामि गंगे … Continue reading बेटियों से मुँह चुराते प्रधानमंत्री पर एक सांस्कृतिक चिट्ठा -कश्यप किशोर मिश्र

बच्चा-बच्चा राम का, जन्मभूमि के काम का – Mayank Saxena

बच्चा-बच्चा राम का, जन्मभूमि के काम का ये नारा लगाने वालों के बच्चे कॉन्वेंट में पढ़ रहे हैं…न कि शिशु मंदिर में…जिनके बड़े हो गए, वे स्वयंसेवक या कारसेवक नहीं हैं…आईटी कम्पनियों में हैं…विदेश में हैं…हिंदी और संस्कृत नहीं, अंग्रेज़ी बोलते हैं…धोती नहीं, स्मार्ट केसुअल्स पहनते हैं…और माता-पिता के पैर तो सुबह उठ कर नहीं ही छूते हैं… तय मानिए, वह न राम के हैं, … Continue reading बच्चा-बच्चा राम का, जन्मभूमि के काम का – Mayank Saxena