काली आंधियां रामराज्य के इसी जघन्य अपराध और पाप के कारण चल रही हैं!
झंझावत। काली आंधियां। वन-प्रांतरों में मचता कोहराम। इधर-उधर विक्षित्प से भागते वन्य जीव। इतना अधिक क्रन्दन और चीख-पुकार। अदीब ने दोनों कानों पर हाथेलियां रख के अपने श्रवण स्रोत बंद कर लिए और चीखा-महमूद! कोई उत्तर नहीं आया। वह फिर चीख़ा, फिर भी उसे कोई जवाब तो नहीं मिला, पर देखा, सामने से गिरता-पड़ता-हांफता महमूद आ रहा है। कहां थे तुम? हुज़ूर….मैं पिछली सदियों … Continue reading काली आंधियां रामराज्य के इसी जघन्य अपराध और पाप के कारण चल रही हैं!