आम आदमी पार्टी की सफलता पर राम नरेश राम के सवाल – (कँवल भारती)

        दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सफलता पर दिल्ली विश्वविद्यालय से शोध छात्र राम नरेश राम ने अपनी चिन्ताओं पर कुछ सवाल मुझसे पूछे हैं. उनका पहला सवाल है– ‘क्या इस पार्टी ने भारतीय राजनीति के एजेंडे को बदल दिया है?’ मेरी अपनी ओपिनियन यह है कि ऐसा अभी तक तो नहीं हुआ है. शायद अभी आम आदमी पार्टी का ही … Continue reading आम आदमी पार्टी की सफलता पर राम नरेश राम के सवाल – (कँवल भारती)

यह न क्रान्ति है, न परिवर्तन – कॅंवल भारती (Kanwal Bharti)

चार राज्यों के चुनाव-परिणामों पर मुझे कुछ नहीं लिखना था, क्योंकि इन चुनावों ने अपने परिणामों का आभास पहले ही करा दिया था। मैं क्या पूरा देश जानता था कि क्या होने वाला है? कारण साफ था कि जनता के सामने कोई विकल्प नहीं था। काॅंग्रेस को हारना ही था, क्योंकि उसका टिकट-वितरण भी गलत था। उसने राजस्थान में बलात्कारियों और अपराधियों के परिजनों को … Continue reading यह न क्रान्ति है, न परिवर्तन – कॅंवल भारती (Kanwal Bharti)

मोदी की जीत के मायने – कँवल भारती (Kanwal Bharti)

यदि आरएसएस और कॉरपोरेट का ‘मोदी-उन्माद’ सफल हो गया, तो किस तरह के हालात देश में पैदा हो सकते हैं, इसकी कल्पना हम उस कालखंड (1999) से कर सकते हैं, जिसमें अटलबिहारी बाजपेयी प्रधानमंत्री थे. तब आरएसएस अपने पूरे प्रभाव में था और उसकी हिंदुत्व-रक्षक सारी भुजाओं को खुली छूट मिली हुई थी. इन हिन्दू वाहिनियों ने अपने मिशन की शुरुआत की थी आदिवासी इलाकों … Continue reading मोदी की जीत के मायने – कँवल भारती (Kanwal Bharti)

राहुल गांधी के नाम एक खुला पत्र – Kanwal Bharti

सम्माननीय राहुल जी, सादर नमस्कार, जय भीम निवेदन करना है कि मेरा नाम कँवल भारती है और मैं एक आंबेडकरवादी और समाजवादी विमर्श का लेखक हूँ. मुझे हिंदी दैनिक अख़बार “अमर उजाला” के 10 अक्टूबर के अंक के जरिये पता चला कि आपने अपने एक कार्यक्रम में संभवत: अलीगढ में कहा था कि ‘यदि आप दलित आन्दोलन को आगे ले जाना चाहते हैं, तो इसके … Continue reading राहुल गांधी के नाम एक खुला पत्र – Kanwal Bharti

जाति-व्यवस्था और दलित वर्ग – Kanwal Bharti

निस्संदेह, जाति का सवाल आसान नहीं है, वह काफी व्यापक और जटिल है. भारत का सामाजिक ढांचा ही सबसे अनूठा है, ऐसा ढांचा दुनिया में और कहीं भी नहीं मिलेगा. पूरी दुनिया में पूंजीवाद की व्यवस्था जिस शोषण को अंजाम दे रही है, वह भारत के मुकाबले में काफी कम है. इसका कारण है, यहाँ जाति-व्यवस्था भी है, जो अन्यत्र नहीं है. यह ब्राह्मणवादी व्यवस्था … Continue reading जाति-व्यवस्था और दलित वर्ग – Kanwal Bharti

हिन्दी दलित साहित्य – कॅंवल भारती

मोहनदास नैमिशराय की ‘हिन्दी दलित साहित्य’ पुस्तक को पढ़ते हूए यह साफ दिखाई देता है कि लेखक ने इसमें मेहनत बहुत की है, लोगों के बीच जा कर बहुत सारे ब्यौरे इकट्ठे किये हैं और उन्हें एक तरतीब दी है। यह अपने आप में एक बड़ा काम है। लेकिन फिर भी मुझे लगता है कि इस पुस्तक का लेखन इतिहास की शक्ल में होना चाहिए … Continue reading हिन्दी दलित साहित्य – कॅंवल भारती

निराला अन्तर्जातीय विवाह और दलित शिक्षा के विरोधी थे – कॅंवल भारती

कहा जा रहा है कि मैंने ‘निराला का वर्णाश्रम प्रेम’ में निराला को आधा उद्धरित किया है, आधा छोड़ दिया है, जिसमें निराला ने शूद्र शक्ति के उत्थान और जागरण में देश के पुनरुद्धार की बात कही है। मैंने जो छोड़ा है, उसे मैं यहाॅं प्रस्तुत कर रहा हूॅं। असल में सवाल छोड़ने का नही है, वरन् विश्लेषण का है। निराला के कथन में व्यंग्य … Continue reading निराला अन्तर्जातीय विवाह और दलित शिक्षा के विरोधी थे – कॅंवल भारती

राम की शक्तिपूजा में पूरा सामन्तवाद है – कॅंवल भारती

बुद्ध ने अपने भिक्षुओं को हिदायत दी थी कि वे कभी भी उनके वचनों को छांदस (उस समय की सामन्ती भाषा) में न लिखें। निराला ने ‘राम की शक्ति पूजा’ छांदस हिन्दी (सामन्ती भाषा) में क्यों लिखी? उन्होंने नागार्जुन की तरह जनभाषा में कविता की रचना क्यों नहीं की? क्या इससे यह साबित नहीं होता कि निराला के सारे संस्कार सामन्ती थे? भाषा से ही … Continue reading राम की शक्तिपूजा में पूरा सामन्तवाद है – कॅंवल भारती

एक और शहादत – कॅंवल भारती

इसमें सन्देह नहीं कि इलावरसन ने आत्महत्या नहीं की, बल्कि उसकी हत्या की गयी है। कोई भी व्यक्ति एटीएम से रुपये निकाल कर मोटरसाइकल से आत्महत्या करने नहीं जायेगा। वह आत्महत्या कर ही नहीं सकता था, क्योंकि उसने प्रेम किया था और दिव्या के साथ एक नया जीवन जीने के लिये संघर्ष किया था। चूॅंकि प्रेम जाति और धर्म के बन्धनों की परवाह नहीं करता … Continue reading एक और शहादत – कॅंवल भारती

कौन है मूलनिवासी? – (कँवल भारती)

दलितों में एक नया संगठन बना है, जो मूलनिवासी की अवधारणा को लेकर चल रहा है. इस संगठन के लोग अभिवादन में भी ‘जय भीम’ की जगह ‘जय मूलनिवासी’ बोलने लगे हैं. ये लोग कहते हैं कि वे मूलनिवासी हैं और बाकी सारे लोग विदेशी हैं. क्या सचमुच ऐसा है? अगर इनसे यह पूछा जाये कि किस आधार पर आप अपने को मूलनिवासी कहते हैं, … Continue reading कौन है मूलनिवासी? – (कँवल भारती)