बारिश किस चिड़िया का नाम?:जल-संकट-2 (साबलखेड़-योगिता के गांव)

हम सबको बारिश बहुत अच्छी लगती है न! सिनेमा के परदे पर जब नायक बारिश में भीगता हुआ नायिका के सामने प्रेम-प्रस्ताव रखता है, हम उसमें अपने-आप को ढूंढने लगते हैं. अगर आप उत्तर भारतीय हैं तो याद कीजिये कितनी दफ़ा बारिश में नहाये हैं, कितनी दफ़ा बारिश के जमा पानी में कागज़ के नाव बनाकर तैरा चुके हैं. मतलब कि आपने बारिश के बगैर … Continue reading बारिश किस चिड़िया का नाम?:जल-संकट-2 (साबलखेड़-योगिता के गांव)

मर किसान : जल-संकट (लातूर-ग्रामीण क्षेत्र)-3

कुछ लोग किसान आत्महत्याओं को फैशन बताते हैं, तो कुछ प्रेम-प्रसंगों को आत्महत्या का कारण बताते हैं.लातूर के जल-संकट की बात करने पर दिल्ली का पढ़ा-लिखा युवा कहता है कि लातूर-वासी जल का अपव्यय करते रहे होंगे. ऐसी संवेदनहीनता हमारे वक़्त में पहले कब देखी गई होगी? हम सब इतने संवेदनहीन हो चुके हैं कि किसान आत्महत्या हमारे लिए एक ख़बर है, पानी की कमी … Continue reading मर किसान : जल-संकट (लातूर-ग्रामीण क्षेत्र)-3

सैराट…चलो मैं तुम्हें मौत की तरफ़ ले चलूं

(सैराट, नागराज मंजुले द्वारा निर्देशित दूसरी फीचर फिल्म है। नागराज की पहली फिल्म ‘फैंड्री’ थी, जिसके लिए उनको सर्वश्रेष्ठ पहली फिल्म का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिला था। फिल्म के बारे में हम आपको कुछ नहीं बताएंगे, क्योंकि ये दोनों ही बेहद कड़वी फिल्में आपको देखनी चाहिए। फिलहाल यह एक गद्य, जो अभिनेता, कवि और लेखक प्रदीप अवस्थी ने लिखा है।) आवाज़ें थम गईं हैं … Continue reading सैराट…चलो मैं तुम्हें मौत की तरफ़ ले चलूं

No Facts, Only Propoganda- Stanly Johny

  Is Kerala a perfect state? It’s not. Is it poverty-free? Don’t kid me. Is it socially progressive? You’ll find all sorts of discrimination and prejudices –caste/class/religions–in the state. Are the fruits of the Kerala model distributed evenly? Of course not–the lower strata, particularly the adivasis, are the hardest hit. So there’s certainly a case to widen the scope of the Kerala model, continue the … Continue reading No Facts, Only Propoganda- Stanly Johny

जल-संकट(लातूर- शहर)-1: यह हमारी सभ्यता के अंत की शुरुआत है

Writer: Devesh Tripathi A Hillele Report   याद कीजिये 2016 के बीत गए महीनों को. हैदराबाद केन्द्रीय विश्वविद्यालय के छात्र रोहित वेमुला की सांस्थानिक हत्या से शुरू हुआ साल बढ़ता हुआ पहुंचा जेएनयू और फिर देशद्रोह से लेकर राष्ट्रवाद की बहसों ने देश के दिलों-दिमाग पर कब्ज़ा जमा लिया. इस बीच इसी देश का एक हिस्सा सूखते-सूखते इतना सूख गया कि देश की नज़र में … Continue reading जल-संकट(लातूर- शहर)-1: यह हमारी सभ्यता के अंत की शुरुआत है