जाति-व्यवस्था और दलित वर्ग – Kanwal Bharti

निस्संदेह, जाति का सवाल आसान नहीं है, वह काफी व्यापक और जटिल है. भारत का सामाजिक ढांचा ही सबसे अनूठा है, ऐसा ढांचा दुनिया में और कहीं भी नहीं मिलेगा. पूरी दुनिया में पूंजीवाद की व्यवस्था जिस शोषण को अंजाम दे रही है, वह भारत के मुकाबले में काफी कम है. इसका कारण है, यहाँ जाति-व्यवस्था भी है, जो अन्यत्र नहीं है. यह ब्राह्मणवादी व्यवस्था … Continue reading जाति-व्यवस्था और दलित वर्ग – Kanwal Bharti

बुद्ध और वर्णव्यवस्था – कॅंवल भारती

डा. भदन्त आनन्द कौसल्यायन ने अपने एक व्याख्यान में कहा है कि एक समय उन्हें गीता पर बहुत श्रद्धा थी। तब वह उसके दूसरे अध्याय के अट्ठारह श्लोकों का पाठ करके ही सोया करते थे। पर, एक बार उन्होंने कलकत्ता के धर्म-राजिक हाल में स्वामी सत्यदेव परिव्राजक को यह कहते सुना कि ‘यदि किसी भी धर्म के, किसी अनुयायी की, कभी यह इच्छा हुई हो … Continue reading बुद्ध और वर्णव्यवस्था – कॅंवल भारती