धर्म की जय हो – Mayank Saxena
रक्तों के सागर में स्नान कर आया है खा कर मानव अंतड़ियां नाखूनों में देखो अभी तक भरा है मज्जा का गूदा आंखों से बह रही है हिंसा…और हिंसा उसके नाम अलग अलग हैं उसका तरीका एक ही धर्म की जय हो अधर्म का नाश हो… Continue reading धर्म की जय हो – Mayank Saxena