मैं उम्र से आगे न निकल जाऊं – ILA JOSHI

हाँ मुझे जलन होती है, उन सब लोगों से, जिनकी ज़रूरतों को, माना जाता है ज़रूरत, मिलता है उन्हें, प्यार, दुलार, सहानुभूति, कंधे का सहारा.. और मेरी उन ज़रूरतों को भी तुम, करते हो नज़रंदाज़, लगती हैं तुम्हे वो अव्वल दर्ज़े की बेवकूफियाँ, मेरे मूर्ख होने के सबूत, प्यार तो बहुत दूर की बात, तरसती हूँ मैं, तुम्हारी आवाज़ तक सुनने को… माँ की तरह … Continue reading मैं उम्र से आगे न निकल जाऊं – ILA JOSHI

हार बहुत ज़रूरी है – Mayank Saxena

हार बहुत ज़रूरी है आपको बताने के लिए कि हर मोर्चे पर आप जीत जाएं ये दुनिया इतनी भी आसान नहीं है ==================== कामरेड सुदीप्तो…. मैं ठीक तुम्हारी ही तरह मर जाना चाहता हूं लड़ते हुए चिल्लाते हुए बिना डरे औऱ बिना एक बार किए उफ़ हां कामरेड क्रांति की इमारत की नींव में भर जाना चाहता हूं मैं ठीक तुम्हारी तरह मर जाना चाहता … Continue reading हार बहुत ज़रूरी है – Mayank Saxena

I Want To Marry a Gay Man – Nina Sangma

Oh yes I do! After going through a series of dalliances or what I like to also call temporary aberrations of the mind, no longer am I willing to suspend my disbelief. Am I the only one who thinks sex is overrated? What about L.O.V.E? I see my friend reading her Mills and Boons…yes yes girl porn for some of you Neanderthals, and the obvious … Continue reading I Want To Marry a Gay Man – Nina Sangma

कानून और गैरकानूनी तो ताकत से निर्धारित होते हैं – Himanshu Kumar

समाज के अन्याय के मामलों में कानून का बहाना बनाने वालों को ये भी स्वीकार कर लेना चाहिये कि जनरल डायर का गोली चलाना भी कानूनी था . भगत सिंह की फांसी भी कानूनी थी . सुक़रात को ज़हर पिलाना कानूनी था . जीसस की सूली की सज़ा कानूनी थी . गैलीलियो की सज़ा कानूनी थी . भारत का आपातकाल कानूनी था . गरीबों की … Continue reading कानून और गैरकानूनी तो ताकत से निर्धारित होते हैं – Himanshu Kumar