मोदी की जीत के मायने – कँवल भारती (Kanwal Bharti)
यदि आरएसएस और कॉरपोरेट का ‘मोदी-उन्माद’ सफल हो गया, तो किस तरह के हालात देश में पैदा हो सकते हैं, इसकी कल्पना हम उस कालखंड (1999) से कर सकते हैं, जिसमें अटलबिहारी बाजपेयी प्रधानमंत्री थे. तब आरएसएस अपने पूरे प्रभाव में था और उसकी हिंदुत्व-रक्षक सारी भुजाओं को खुली छूट मिली हुई थी. इन हिन्दू वाहिनियों ने अपने मिशन की शुरुआत की थी आदिवासी इलाकों … Continue reading मोदी की जीत के मायने – कँवल भारती (Kanwal Bharti)