खवाब और सपना – Khursheed Anwar

खवाब और सपना मेरे लिए ख्वाब और सपनों में बड़ा अंतर है. ख्वाब आते हैं, हमारी मर्जी के बिना. हाँ कभी कभी हम ख्वाब लाते भी हैं लेकिन सपने तो हर पल पलते है हमारे अंदर. हम सपने तराशते हैं…मगर सपने हमारे लिए सिर्फ हम नहीं तराशते. हमको सपने बेचे भी जाते हैं. हम खरीदते भी. उम्मीद में कि शायद सपने साकार हो जायें . … Continue reading खवाब और सपना – Khursheed Anwar