बारह बरस से भटकती रूहें और एक चुनाव सर्वे: अभिषेक श्रीवास्तव
इतिहास गवाह है कि प्रतीकों को भुनाने के मामले में फासिस्टों का कोई तोड़ नहीं. वे तारीखें ज़रूर याद रखते हैं. खासकर वे तारीखें, जो उनके अतीत की पहचान होती हैं. खांटी भारतीय संदर्भ में कहें तो किसी भी शुभ काम को करने के लिए जिस मुहूर्त को निकालने का ब्राह्मणवादी प्रचलन सदियों से यहां रहा है, वह अलग-अलग संस्करणों में दुनिया के तमाम हिस्सों … Continue reading बारह बरस से भटकती रूहें और एक चुनाव सर्वे: अभिषेक श्रीवास्तव