कौन है मूलनिवासी? – (कँवल भारती)

दलितों में एक नया संगठन बना है, जो मूलनिवासी की अवधारणा को लेकर चल रहा है. इस संगठन के लोग अभिवादन में भी ‘जय भीम’ की जगह ‘जय मूलनिवासी’ बोलने लगे हैं. ये लोग कहते हैं कि वे मूलनिवासी हैं और बाकी सारे लोग विदेशी हैं. क्या सचमुच ऐसा है? अगर इनसे यह पूछा जाये कि किस आधार पर आप अपने को मूलनिवासी कहते हैं, … Continue reading कौन है मूलनिवासी? – (कँवल भारती)

संघ परिवार का दलित आन्दोलन – कँवल भारती

पिछले चार साल से संघ परिवार की ओर से हिन्दी में “दलित आन्दोलन पत्रिका” मासिक निकल रही है, जो अपनी भव्यता में किसी भी दलित पत्रिका का मुकाबला नहीं कर सकती. बढ़िया चिकने मैपलीथो कागज पर छपने वाली, बड़े आकार की इस बारह पृष्ठीय पत्रिका का हर पृष्ठ रंगीन होता है. इसके प्रकाशक-संपादक डा. विजय सोनकर शास्त्री हैं, जो एक समय केन्द्र की बाजपेयी सरकार … Continue reading संघ परिवार का दलित आन्दोलन – कँवल भारती

मगहर का ‘दलित बचपन’ विशेषांक – कँवल भारती (Kanwal Bharti)

कँवल भारती प्रतिरोध, परिवर्तन और प्रगति की अनियतकालीन पत्रिका ‘मगहर’ का 432 पृष्ठों का ‘दलित बचपन’ विशेषांक दो कारणों से अत्यन्त महत्वपूर्ण है. एक, इसको पढ़ना सर्वथा नये अनुभवों से गुजरना है और दो, यह दलित साहित्य में संभवतः पहला काम है, जो मुकेश मानस की सम्पादकीय क्षमता से दस्तावेजी बन गया है. इस समय हिन्दी में लगभग पचास से भी ज्यादा पत्र-पत्रिकाओं का प्रकाशन … Continue reading मगहर का ‘दलित बचपन’ विशेषांक – कँवल भारती (Kanwal Bharti)

सवाल प्रतिनिधित्व का है, आरक्षण का नहीं – कँवल भारती (Kanwal Bharti)

नामवर सिंह ने गत दिनों दस किताबों का विमोचन किया। उनमें एक किताब दलित लेखक अजय नावरिया की थी। दसों किताबें सवर्णों की होनी चाहिए थीं। उनमें एक दलित कैसे घुस गया? प्रकाशक की यह मजाल कि वह सवर्णों की जमात में दलित को खड़ा कर दे! बस नामवर सिंह का पारा चढ़ गया। वह जितना गरिया सकते थे, उन्होंने दलित को गरियाया। फिर उन्होंने … Continue reading सवाल प्रतिनिधित्व का है, आरक्षण का नहीं – कँवल भारती (Kanwal Bharti)