कमला नगर दोस्तों को एक आमंत्रण (Kishore Jha)
वर्षों पुरानी आंटे की चक्की और पहलवान की दूकान अब नहीं रहे वक़्त का अहसास कराने वाला बिड़ला मिल का सायरन भी अब नहीं बजता बिड़ला मिल की तरह गणेश मिल और न जाने कितनी मिलों पर ना जाने कब से ताला लटका है घंटा घर से चांदनी चौक तक चलता तांगा अब शायद ही दिखे पर साठ के दशक में चलने वाली ट्राम … Continue reading कमला नगर दोस्तों को एक आमंत्रण (Kishore Jha)