अपने समय की एक औरत का दर्द और कुछ सवाल
साल के शुरू में एक कविता आयी थी यवन की परी. स्त्री की यातना, पीडा़, दर्द और आंसुओं में लिपटी उस कहानी को कहानी भर माना जा सकता था. माना भी गया. मगर यहां जो कुछ हम पढ रहे हैं-वह अपने आसपास की पीडा़ है, वेदना है, यातना है और कुछ सवाल हैं-जिनके जवाब बाकी हैं. हो सकता है कि कुछ प्रतिप्रश्न भी हों, जिन्हें … Continue reading अपने समय की एक औरत का दर्द और कुछ सवाल