क्या होगा धर्मान्तरण कानून से? – कॅंवल भारती

संघ परिवार और भाजपा ने देश में लगभग वही साम्प्रदायिक हालात पैदा कर दिए हैं, जो उसने 1990-93 में पैदा किए थे। 1993 में केन्द्र की कांग्रेस सरकार ने आक्रामक साम्प्रदायिकता से निपटने के लिए संसद में एक ‘धर्म-विधेयक’ प्रस्तुत किया था। अगर वह विधेयक पास हो गया होता, तो भाजपा की बेलगाम साम्प्रदायिकता पर लगाम लग गई होती। पर कांग्रेस की गलती से ही … Continue reading क्या होगा धर्मान्तरण कानून से? – कॅंवल भारती

जाति-धर्म के शिकन्जे में लोकतन्त्र – कॅंवल भारती

          निस्सन्देह इस बार के लोकसभा चुनावों में एक बड़ा सवाल भ्रष्टाचार का उभर कर आया है। अरविन्द केजरीवाल से शुरु हुई इस लड़ाई ने यदि भ्रष्टाचार के सवाल पर युवा मध्य वर्ग को गम्भीर न बनाया होता, तो शायद भाजपा भी इसे अपने एजेण्डे में रखने वाली नहीं थी। केजरीवाल की भ्रष्टाचार-उन्मूलन की लड़ाई कहीं जनक्रान्ति में सफल न हो जाये,इसलिये … Continue reading जाति-धर्म के शिकन्जे में लोकतन्त्र – कॅंवल भारती