प्रिय प्रधानमंत्री जी, ये खुला ख़त आपके नाम… – कृष्णकांत

पत्रकार, लेखक और प्रकाशक कृष्णकांत की यह खुली चिट्ठी बिल्कुल सही समय पर आई है। सही समय की परिभाषा, आप इसे पढ़ कर समझ जाएंगे। हम आशा करते हैं कि कृष्णकांत हमारे लिए और सबके लिए लिखते रहें। इस चिट्ठी में लगभग वही भाव है, जो शायद हम सब अंदर से इस देश के प्रधानमंत्री जी से व्यक्त करना चाहते हैं। आदरणीय प्रधानमंत्री जी नमस्कार! … Continue reading प्रिय प्रधानमंत्री जी, ये खुला ख़त आपके नाम… – कृष्णकांत

“Mother, I will not become you”, sings the band Swaang in their Maa Nee Meri

ENGLISH TRANSLATION of ‘ Maa Nee Meri’ Mixed in every morsel, What was that chant you kept repeating? In the garb of concern and worry, Why was fear the only virtue I learnt of your teaching? Mother, I will not fear Mother, I will not become you. Drown! I shall drown, but not succumb into swimming with the tide; Walk! I shall close these eyes … Continue reading “Mother, I will not become you”, sings the band Swaang in their Maa Nee Meri

दिल्ली में ‘विवेक के हक़ में’ बड़ी जुटान, फासीवाद के खिलाफ एलान-ए-जंग!

कट्टरपंथ जब अपने पाँव पसारता है, सबसे पहले बदलाव की बात करने वालों को ही कुचलता है। समय की बीहड़ता ही है कि इस कथन को समझने के लिए अब हमें इतिहास से उदाहरण लेने की जरूरत नहीं बची। पिछले दो सालों के भीतर ही हमारे 3 लेखकों को मारा जा चुका है। फासीवाद, जिसकी बात हम लगातार करते आये हैं, अब खुलकर हमारे सामने … Continue reading दिल्ली में ‘विवेक के हक़ में’ बड़ी जुटान, फासीवाद के खिलाफ एलान-ए-जंग!

मैं कुलबर्गी जी की हत्या के विरोध में साहित्य अकादमी पुरस्कार को लौटाता हूँ – उदय प्रकाश

प्रख्यात हिंदी कहानीकार और उपन्यासकार उदय प्रकाश ने प्रोफेसर कलबुर्गी की हत्या के विरोध में अहम प्रतिरोध दर्ज करवाते हुए, 2010-11 के लिए प्रदान किया गया, अपना साहित्य अकादमी पुरस्कार वापस करने का निर्णय किया है। अपने सोशल मीडिया पेज पर उन्होंने इस बाबत घोषणा की, जो इस प्रकार है, पिछले समय से हमारे देश में लेखकों, कलाकारों, चिंतकों और बौद्धिकों के प्रति जिस तरह का … Continue reading मैं कुलबर्गी जी की हत्या के विरोध में साहित्य अकादमी पुरस्कार को लौटाता हूँ – उदय प्रकाश

Single Screen – हायवे (मराठी) : जब फिल्म का अंत एक सुखद शुरुआत हो… – प्रदीप अवस्थी

इसी नाम की एक चर्चित हिंदी फिल्म 2013 के अंत में आई थी, लेकिन हायवे मराठी कुछ अलग है। हिल्ले के नए कलेवर में बहुत कुछ ऐसा शामिल है, जिसकी कमी कई गंभीर पाठकों को भी खल रही थी, सिनेमा हमारे लिए अब नियमित अंग होगा। जैसे कि हम कुछ साथियों की मदद से आपको बेहतरीन शॉर्ट फिल्म्स दिखा रहे हैं, वैसे ही कुछ साथी … Continue reading Single Screen – हायवे (मराठी) : जब फिल्म का अंत एक सुखद शुरुआत हो… – प्रदीप अवस्थी

एक देश की मौत – भाग 1

वो एक दोपहर थी, जब अचानक शाम का अख़बार दोपहर में छप कर आ गया था, टीवी सेट्स के आगे आस-पास के घरों के लोग भी आ कर जुटने लगे थे और बूढ़े अपने ट्रांजिस्टर ट्यून करने लगे थे। अचानक तेज़ शोर सुनाई दिया, छतों पर लोग आ गए थे और प्रभातफेरी की टोली, जो कि पिछले 3 साल से हर रोज़ सुबह ‘जय श्री … Continue reading एक देश की मौत – भाग 1

तीस्ता के खिलाफ जाओ, सन टीवी की मदद करो.. – गृह सचिव को क्यों हटाया गया? (विशेष – अंदरख़ाने से)

    2015 का अगस्त केंद्र सरकार के लिए अच्छा नहीं रहा, तिलमिलाहट और खीझ से भरा सरकार का ये कदम, शायद इस महीने की सबसे बड़ी ख़बर थी, जिस पर मुख्यधारा का मीडिया चर्चा करना ज़रूरी नहीं समझेगा। ख़बर बड़ी है और यह है कि खीझी हुई केंद्र सरकार, गृह सचिव ही नहीं, गृह मंत्री से इतनी नाराज़ है कि बिना गृह मंत्री की … Continue reading तीस्ता के खिलाफ जाओ, सन टीवी की मदद करो.. – गृह सचिव को क्यों हटाया गया? (विशेष – अंदरख़ाने से)

फ़िराक़ – लोग ढूँढेंगे हमें भी हाँ मगर सदियों के बाद : मुनव्वर राणा

हिंदी और उर्दू बोलने वाली दुनिया जब ऊंघ रही थी, उस वक़्त 28 अगस्त, 2015 के रोज़ एक करिश्मा हुआ। ट्विटर पर अंग्रेज़ी बोलने वाली नौजवान पीढ़ी को कोई याद आ गया। दोपहर होते-होते ट्विटर पर फ़िराक़ लफ़्ज़ रोमन में (#firaq)टॉप ट्रेंड कर रहा था। पाकिस्तान से हिंदुस्तान और दुनिया भर में उर्दू सुखन के चाहने वाले, ट्विटर पर कम लफ़्ज़ों में ही सही, फ़िराक़ के … Continue reading फ़िराक़ – लोग ढूँढेंगे हमें भी हाँ मगर सदियों के बाद : मुनव्वर राणा

दशरथ मांझी की जीत हमारे पूरे सामाजिक तंत्र की हार है – प्रदीप अवस्थी

हालांकि मॉडरेटर के तौर पर मैं साफ कर दूं कि केतन मेहता की फिल्म मुझे औसत ही लगी, लेकिन फिर भी प्रदीप अवस्थी का यह लेख पसंद आया। इसे पढ़िए और खासतौर पर गुजरात में घट रहे एक आरक्षण की मांग करने वाली ऊंची जाति के आंदोलन के आलोक में इसे देखिए… मॉडरेटर उनकी स्त्रियों को बाज़ार में सरेआम छेड़ा गया | उन्होंने रोका तो … Continue reading दशरथ मांझी की जीत हमारे पूरे सामाजिक तंत्र की हार है – प्रदीप अवस्थी