हम सब अभिशप्त हैं, क्योंकि हम देख और महसूस कर पाते हैं – Mayank Saxena

आप वो समाज हैं, जो बाबरी गिरने के बाद घरों की छतों पर खड़े हो कर थालियां पीट रहे थे..घंटे-घड़ियाल बजा रहे थे…रात को मशाल ले कर विजय जुलूस निकाल रहे थे…दीए जला रहे थे… आप वह समाज हैं, जो गुजरात के निर्मम जनसंहार में हज़ार लोगों के बेरहम क़त्ल को गोधरा को लेकर तर्कसंगत बताने में लगे थे…बिल्कीस के बलात्कार, उसकी तीन साल की … Continue reading हम सब अभिशप्त हैं, क्योंकि हम देख और महसूस कर पाते हैं – Mayank Saxena

जब अंग्रेज़ देश छोड़कर जा रहे थे तब आरएसएस कबड्डी खेलनेवाले हिंदू लड़कों के गिरोह से ज़्यादा कुछ नहीं था – Nitin Thakur

जब अंग्रेज़ देश छोड़कर जा रहे थे तब आरएसएस कबड्डी खेलनेवाले हिंदू लड़कों के गिरोह से बहुत ज़्यादा कुछ नहीं था। खेल के बहाने उनमें हिंदू पहचान का इंजेक्शन भरा जा रहा था। घर वाले संस्कार पढ़ाने और सेहत बनाने के लिए बच्चों को शाखा भेजते रहे और वही बच्चे वापसी में ‘कुछ अधिक हिंदू’ होने का दंभ दिमाग में भरे आते रहे। तब हिंदुओं … Continue reading जब अंग्रेज़ देश छोड़कर जा रहे थे तब आरएसएस कबड्डी खेलनेवाले हिंदू लड़कों के गिरोह से ज़्यादा कुछ नहीं था – Nitin Thakur

Shahid’s writer Sameer Gautam calls Apurva Asrani bad news

This is personal rant so please do not get irked by the heavy usage of “I” in the story. It is based on a true story just like the film Shahid. So, where do I start? Let me start by saying that I am the writer of Shahid that no one in the industry knows about except my team and my Director. You all know … Continue reading Shahid’s writer Sameer Gautam calls Apurva Asrani bad news

Apurva, writer of Simran speaks up against Kangana’s title snatching moves

Apoorva Asrani is a respected writer and video editor in Mumbai film circles and he epitomizes Local is International. He is known for writing on subjects close to his heart. His film ALIGARH had won him love and support of the LGBT  community and the progressives around the world. A gender sensitive man Apoorva had so far always supported Kangana Ranaut ( the Indian actress … Continue reading Apurva, writer of Simran speaks up against Kangana’s title snatching moves

राजनीतिक ताकत खैरात में नहीं मिलती – Rakesh Kayasth

राजनीतिक शब्दावली में जिसे लिबरल डेमोक्रेट कहते हैं, मैं उसी तरह का आदमी हूं। वामपंथियों और दक्षिणपंथियों के संपर्क में बराबर-बराबर रहा हूं, इसलिए झुकाव किधर है, यह तय कर पाना मुश्किल है। बहुत सी सामाजिक परंपराओं में आस्था है। धर्म भी मानता हूं, इसलिए परंपरागत अर्थ में आप मुझे दक्षिणपंथ की तरफ झुका आदमी समझ सकते हैं। मैं उन लोगो में नहीं हूं जिन्हे … Continue reading राजनीतिक ताकत खैरात में नहीं मिलती – Rakesh Kayasth

रवीश बड़े नहीं ये वक्त बहुत छोटा है- Rakesh Kayasth

  बड़ी शख्सियतों की परछाइयों तक से मुझे  डर लगता है या खुलकर कहूं तो एलर्जी है। अनगिनत नामचीन लोगो से टकराने के बावजूद कभी निजी पीआर में नहीं पड़ा। मेरे व्यकित्व की अपनी सीमाएं, मेरा इगो, आप जो भी मानें। ऐसे में मुझे अपने किसी समकालीन या हमपेशा आदमी पर लेख लिखना पड़े तो ये वाकई बहुत कष्टप्रद है। कष्ट के साथ थोड़ी सी … Continue reading रवीश बड़े नहीं ये वक्त बहुत छोटा है- Rakesh Kayasth