मेरी माँ का इतिहास

1. मेरी माँ बताती है मेरे पूर्वज डांगर खाते थे. और बड़ी जातियों के विवाह में बचा बासी भोजन माँ ने बताया हमारे रिश्तेदारों के घर या तो दक्षिण में थे या उत्तर में आज भी उनके घर कमोबेश उसी दिशा में होते हैं मेरा भी घर गावं के दक्खिन ही है. 2. पता पूछने पर न चाहते हुए भी लोग जान जाते हैं हमारी … Continue reading मेरी माँ का इतिहास

जला कर मारने, गोली से उड़ा देने या नरसंहार के लिए ‘असहिष्‍णुता’ (इनटोलरेंस) सही शब्‍द नहीं है – अरुंधति राय

हालांकि, मैं नहीं मानती कि कोई अवॉर्ड हमारे काम को आंकने का सही पैमाना है। मैं लौटाए गए अवॉर्ड्स की सूची में 1989 में प्राप्‍त नेशनल अवॉर्ड (बेस्‍ट स्‍क्रीनप्‍ले के लिए) को भी शामिल करती हूं। मैं यह साफ कर देना चाहती हूं कि मैं यह अवॉर्ड इसलिए नहीं लौटा रही क्‍योंकि मैं उस बात से आहत हूं जिसे ‘बढ़ती कट्टरता’ कहा जा रहा है … Continue reading जला कर मारने, गोली से उड़ा देने या नरसंहार के लिए ‘असहिष्‍णुता’ (इनटोलरेंस) सही शब्‍द नहीं है – अरुंधति राय

तुम्हीं चैनल, तुम्हीं पैनल – Dilip Mandal

तुम्हीं चैनल, तुम्हीं पैनल, तुम्हीं एंकर, तुम्हीं विश्लेषक, तुम्हीं पक्ष, तुम्हीं विपक्ष, तुम वादी, तुम्हीं प्रतिवादी, तुम्हीं दक्षिण, तुम्हीं वाम, तुम्हीं ख़ास, तुम्हीं आम, तुम्हीं सेकुलर, तुम्हीं कम्यूनल। साल दर साल, दिन पर दिन, रात दर रात, राष्ट्रीय चैनलों पर सवर्ण एंकर, सवर्ण पैनलिस्ट के साथ पूरे देश पर चर्चा कर रहे हैं। वे आपस में लड़ते हैं और आख़िर में इस देश की बहुसंख्यक … Continue reading तुम्हीं चैनल, तुम्हीं पैनल – Dilip Mandal

Gandhi did not dream of India that was rich or powerful, but of an India that was fair and just

He looked rather like this, 68 years ago, to his assassin. He looked straight into his eyes, quite exactly like this. Gandhi was walking, of course, not standing. And he walked straight into those three bullets. He embraced those darts, he did. With the might of his pain for others, the depth of his faith in God, he hugged them. He had fought for years … Continue reading Gandhi did not dream of India that was rich or powerful, but of an India that was fair and just

Shilpa Rao to headline live music gig to celebrate Peace and Harmony on Mahatma’s birth anniversary

Mumbai, 2nd of October: If it’s about Peace, Love, Harmony, and Music, then it is at The Gandhi Peace Festival 2015 – Harmony Rocks on 2nd October, 2015 ie today! when all roads will lead to the Bandra Amphitheatre, 6 PM, onwards. In celebration of Peace on the anniversary of Mahatma Gandhi’s birthday, the Bombay Rock Association is bringing together an eclectic mix of musicians and … Continue reading Shilpa Rao to headline live music gig to celebrate Peace and Harmony on Mahatma’s birth anniversary

आप कहते हैं कि यह देश बीमार नहीं है और कि यह मनोरोगियों का देश नहीं है? – Dilip Mandal

अमेरिका, 1964. अमेरिका की ब्लैक आबादी वोटिंग के अघिकार और भेदभाव के ख़ात्मे के लिए सिविल राइट्स आंदोलन कर रही है। भयानक दमन चल रहा है। श्वेत नस्लवादी समूह लगातार उनपर ख़ूनी हमले कर रहे हैं। लोग मारे जा रहे हैं। घर जलाए जा रहे हैं। इस आंदोलन का साथ देने के लिए लगभग 1,000 श्वेत युवक पढाई छोड़कर आंदोलन में कूद पड़ते हैं। श्वेत … Continue reading आप कहते हैं कि यह देश बीमार नहीं है और कि यह मनोरोगियों का देश नहीं है? – Dilip Mandal

जो इस पागलपन में शामिल नहीं है, वह मारा जाएगा – Dilip Mandal

इस तस्वीर को ग़ौर से देखिए। बताया गया है कि यह छत्तरपुर की उस महिला की तस्वीर है, जिसे निर्वस्त्र कर पेशाब पिलाने की खबर छपी थी। घटना के बाद अफसर लोग पूछताछ कर रहे हैं। होने को तो यह देश में कहीं की भी तस्वीर हो सकती है। इस तस्वीर में पुरुष अधिकारियों की जगह खुद को रखकर सोचिए। क्या आपको ऐसा महसूस हो … Continue reading जो इस पागलपन में शामिल नहीं है, वह मारा जाएगा – Dilip Mandal

राजीव गोस्वामी याद है आप को? हार्दिक पटेल याद रहेगा? – श्याम आनंद झा

मंडल कमीशन की सिफारिशों को मंज़ूरी के बाद देश से दिल्ली तक सवर्ण युवकों को भ्रमित कर, एक तरह की सामंती मानसिकता को एक आंदोलन के रंग में पेश किया गया था। लेकिन हार्दिक पटेल के उभार को भी सिर्फ एक राजनीति या सिर्फ एक आंदोलन की तरह देखने की ज़रूरत नहीं है। जब तक इसकी असलियत सामने नहीं आती, तब तक इसको हर कोण से … Continue reading राजीव गोस्वामी याद है आप को? हार्दिक पटेल याद रहेगा? – श्याम आनंद झा

सरकार या ईवेंट मैनेजमेंट? – रवीश कुमार

 सौजन्य – एनडीटीवी इंडिया देश काम से चलता है, लेकिन पिछले कई सालों से सरकारें आंकड़ों से काम चला रही हैं। इन आंकड़ों में एक और आंकड़ा शामिल करना चाहिए, बयानों का आंकड़ा। आंकड़े कि कब, किसने, कहां पर और किस तरह का बयान दिया, आपत्तिजनक बयान कौन से थे, किन बयानों का सबने स्वागत किया, किन बयानों पर विवाद हुआ, कौन से बयान वापस … Continue reading सरकार या ईवेंट मैनेजमेंट? – रवीश कुमार