Dalit woman axed to death after rape in Haryana

A 35-year-old Dalit widow was allegedly axed to death after being raped by a man of upper caste at Rambas village of Mahendergarh district on Saturday. The accused identified as Satbir Thakur, 36, a resident of the same village, who was arrested by the police on Saturday. The police have booked him for rape and murder, besides provisions of the SC/ST Act. The accused had … Continue reading Dalit woman axed to death after rape in Haryana

बुद्ध और वर्णव्यवस्था – कॅंवल भारती

डा. भदन्त आनन्द कौसल्यायन ने अपने एक व्याख्यान में कहा है कि एक समय उन्हें गीता पर बहुत श्रद्धा थी। तब वह उसके दूसरे अध्याय के अट्ठारह श्लोकों का पाठ करके ही सोया करते थे। पर, एक बार उन्होंने कलकत्ता के धर्म-राजिक हाल में स्वामी सत्यदेव परिव्राजक को यह कहते सुना कि ‘यदि किसी भी धर्म के, किसी अनुयायी की, कभी यह इच्छा हुई हो … Continue reading बुद्ध और वर्णव्यवस्था – कॅंवल भारती

संघ परिवार का दलित आन्दोलन – कँवल भारती

पिछले चार साल से संघ परिवार की ओर से हिन्दी में “दलित आन्दोलन पत्रिका” मासिक निकल रही है, जो अपनी भव्यता में किसी भी दलित पत्रिका का मुकाबला नहीं कर सकती. बढ़िया चिकने मैपलीथो कागज पर छपने वाली, बड़े आकार की इस बारह पृष्ठीय पत्रिका का हर पृष्ठ रंगीन होता है. इसके प्रकाशक-संपादक डा. विजय सोनकर शास्त्री हैं, जो एक समय केन्द्र की बाजपेयी सरकार … Continue reading संघ परिवार का दलित आन्दोलन – कँवल भारती

कौन है मूलनिवासी? – (कँवल भारती)

दलितों में एक नया संगठन बना है, जो मूलनिवासी की अवधारणा को लेकर चल रहा है. इस संगठन के लोग अभिवादन में भी ‘जय भीम’ की जगह ‘जय मूलनिवासी’ बोलने लगे हैं. ये लोग कहते हैं कि वे मूलनिवासी हैं और बाकी सारे लोग विदेशी हैं. क्या सचमुच ऐसा है? अगर इनसे यह पूछा जाये कि किस आधार पर आप अपने को मूलनिवासी कहते हैं, … Continue reading कौन है मूलनिवासी? – (कँवल भारती)

क्या बुद्ध को ही राम के चरित्र में रूपांतरित किया गया? – कँवल भारती

  मोतीराम शास्त्री बनारस के एक बहुत बड़े बौद्ध विद्वान हुए हैं, जो अपनी अनूठी स्थापनाओं की वजह से दलित साहित्य में हमेशा जीवित रहेंगे. उनकी कई स्थापनाओं में से एक स्थापना यह है कि ‘अवतार’ का अर्थ है, ‘उतारा हुआ’ यानी नक़ल. इस आधार पर उनका कहना था कि राम का अवतार बुद्ध का ‘उतार’ है और कृष्ण का अवतार हजरत मूसा का ‘उतार’ … Continue reading क्या बुद्ध को ही राम के चरित्र में रूपांतरित किया गया? – कँवल भारती

संघ परिवार का दलित आन्दोलन – कँवल भारती

पिछले चार साल से संघ परिवार की ओर से हिन्दी में “दलित आन्दोलन पत्रिका” मासिक निकल रही है, जो अपनी भव्यता में किसी भी दलित पत्रिका का मुकाबला नहीं कर सकती. बढ़िया चिकने मैपलीथो कागज पर छपने वाली, बड़े आकार की इस बारह पृष्ठीय पत्रिका का हर पृष्ठ रंगीन होता है. इसके प्रकाशक-संपादक डा. विजय सोनकर शास्त्री हैं, जो एक समय केन्द्र की बाजपेयी सरकार … Continue reading संघ परिवार का दलित आन्दोलन – कँवल भारती

लोकतंत्र में हिंसा – कँवल भारती

(कँवल भारती) क्या लोकतंत्र में हिंसा उचित है? शायद ही कोई इसका जवाब हाँ में देना चाहेगा. लेकिन फिर भी हिंसा लगातार जारी है. भारत का कोई भी राज्य हिंसा से अछूता नहीं है. यह अब आम समस्या हो गयी है. लेकिन लोकतंत्र के प्रहरियों ने कभी भी इस पर कारगर तरीके से विचार नहीं किया. यह विषय मुख्य रूप से चर्चा के केन्द्र में … Continue reading लोकतंत्र में हिंसा – कँवल भारती

मगहर का ‘दलित बचपन’ विशेषांक – कँवल भारती (Kanwal Bharti)

कँवल भारती प्रतिरोध, परिवर्तन और प्रगति की अनियतकालीन पत्रिका ‘मगहर’ का 432 पृष्ठों का ‘दलित बचपन’ विशेषांक दो कारणों से अत्यन्त महत्वपूर्ण है. एक, इसको पढ़ना सर्वथा नये अनुभवों से गुजरना है और दो, यह दलित साहित्य में संभवतः पहला काम है, जो मुकेश मानस की सम्पादकीय क्षमता से दस्तावेजी बन गया है. इस समय हिन्दी में लगभग पचास से भी ज्यादा पत्र-पत्रिकाओं का प्रकाशन … Continue reading मगहर का ‘दलित बचपन’ विशेषांक – कँवल भारती (Kanwal Bharti)

सवाल प्रतिनिधित्व का है, आरक्षण का नहीं – कँवल भारती (Kanwal Bharti)

नामवर सिंह ने गत दिनों दस किताबों का विमोचन किया। उनमें एक किताब दलित लेखक अजय नावरिया की थी। दसों किताबें सवर्णों की होनी चाहिए थीं। उनमें एक दलित कैसे घुस गया? प्रकाशक की यह मजाल कि वह सवर्णों की जमात में दलित को खड़ा कर दे! बस नामवर सिंह का पारा चढ़ गया। वह जितना गरिया सकते थे, उन्होंने दलित को गरियाया। फिर उन्होंने … Continue reading सवाल प्रतिनिधित्व का है, आरक्षण का नहीं – कँवल भारती (Kanwal Bharti)

JOTIRAO GOVINDRAO PHULE – Dr. Y.D. Phadke

Dr. Y.D. Phadke. This brief Life Sketch of Mahatma Jotirao Phule is written by the noted the scholar Dr.Y.D. Phadke. He is the editor of the ‘Collected Words of Mahatma Phule’ in Marathi. He is also an eminent scholar of Mahatma Phule and the Satyashodhak Movement. JOTIRAO GOVINDRAO PHULE occupies a unique position among the social reformers of Maharashtra in the nineteenth century. While other … Continue reading JOTIRAO GOVINDRAO PHULE – Dr. Y.D. Phadke