अरे हैवानों-दरिंदों – (कँवल भारती)

अरे हैवानों-दरिंदों तुमने साबित कर दिया कि तुम्हारा कोई वास्ता इस्लाम से नहीं है, तुमने खून से लथपथ कर दिया कुरान को कौन शैतान है जो तुम्हें इस्लाम का गलत सबक सिखाता है कौन है जो तुम्हें सिखाता है कि मारोगे बेगुनाहों को तो ख़ुदा तुम्हें बख्शेगा जन्नत? कितना अँधेरा भर दिया है तुम्हारे जहनों में आँखों पर पर्दा—कि जिसे समझते हो सबाबे-जिहाद वह कितना … Continue reading अरे हैवानों-दरिंदों – (कँवल भारती)

सच कहना हो ज़रूरी तो जेल में रहिये- पंकज परवेज़

ऐसे हर शख्स को सूली पे चढ़ाया जाये जो कहे सो रहा इंसान जगाया जाये सच कहना हो ज़रूरी तो जेल में रहिये हुक्म मुंसिफ का है, दस्तूर बनाया जाये क्या हिमाक़त है, हमें आईना दिखाता है जल्द महफ़िल में चिराग़ों को बुझाया जाये सरतराशी का बहुत ख़ूब हुनर है उसका रस्म कहती है कि सरताज बनाया जाये ना ज़मीं गोल ना सूरज के लगाती … Continue reading सच कहना हो ज़रूरी तो जेल में रहिये- पंकज परवेज़

Mayank Saxena

भूलने का दर्शन…

भूलने का दर्शन… *********** भूल जाओ जो कुछ हुआ आगे बढ़े उस से हां लेकिन तुम नहीं बढ़ोगे आगे अपनी मज़हबी-धार्मिक पवित्र किताबों के जिनको हमारे साथ हुए … अन्याय से भी कहीं पहले लिख दिया था अनजान लोगों ने तुम याद रखोगे 600 साल पहले हुआ एक हमला 1400 साल से चल रहा धर्मयुद्ध न जाने कब तोड़ा गया (या फिर नहीं) एक मंदिर … Continue reading भूलने का दर्शन…

अक्सर अकेले में ढुंढती हूँ

अक्सर अकेले में ढुंढती हूँ, उन छः महीनों का हाल, बस खुद को यकीं दिलाने को, के हाँ, शायद मैं बचा सकती थी तुम्हें…. खंगालती हूँ अपने दिमाग का हर इक कोना, याद करने को उस ताले का नंबर, जिसमे छुपाये तुम्हारी डायरी के कुछ पन्ने, शायद अभी भी इंतजार करते होंगे मेरा… तुम्हारी काबिलियत पर कभी भी, शक न था मुझे, तभी तो आज … Continue reading अक्सर अकेले में ढुंढती हूँ