This one is for Teesta – Salil Tripathi

#BraveTeesta This one is for Teesta – and other stubborn souls trying to keep India the way it was meant to be: First they went after Sanjiv Bhatt But I said nothing because I wasn’t a cop. Then the witnesses in Asaram’s case started dropping dead But I said nothing because I wasn’t a fan of any guru-buru. Then the witnesses of Vyapam case started … Continue reading This one is for Teesta – Salil Tripathi

Mayank Saxena

मैं लौटता हूं मगर लौट नहीं पाता – Mayank Saxena

मैं लौटता हूं मगर लौट नहीं पाता देखता हूं तो पाता हूं कि उनमें से कोई नहीं है वैसा जैसा छोड़ गया था मैं पेड़ों की ऊंचाई घटती रही और उसे पूरी करती रही बढ़ती ऊंचाई दीवारों की दोस्तों ने कहा था कि यहीं मिलेंगे और मिलते रहे वो अलग अलग शहरों में कितनी ही कहानियों के किरदार बदल गए और कहानियां भी नहीं बदले … Continue reading मैं लौटता हूं मगर लौट नहीं पाता – Mayank Saxena

क्या-क्या न गुल खिलाये है गुजरात का लला – Pankaj Parvez

क्या-क्या न गुल खिलाये है गुजरात का लला ओबामा को पटाये है गुजरात का लला लक्खी सूट पे लिखे सोने से अपना नाम फैशन नया चलाये है गुजरात का लला हर घर को पंद्रह लाख देने का वादा था ठेंगा मगर दिखाये है गुजरात का लला होरी की मौत, भूमि लुटेरों की मौज हो क़ानून बदलवाये है गुजरात का लला जो भी बोला सच वो … Continue reading क्या-क्या न गुल खिलाये है गुजरात का लला – Pankaj Parvez

वे मुझ पर हँस रहे थे – रिज़वी

वे मुझ पर हँस रहे थे, ढाबोलकर और पणसरे की हत्या भारत में हुई, सबीन महमूद की कराची, पाकिस्तान में, फिर हत्यारे एक कैसे हुए? मैं अंधविश्वास के विरोधी नरेन्द्र ढाबोलकर और गरीबों के अधिकार के लिए संघर्ष करने वाले गोविंद पणसरे के हत्यारों पर पाकिस्तान में मानवाधिकार के लिए संघर्ष करने वाली सबीन महमूद की हत्या का भी आरोप लगा रहा था. ढाबोलकर और पणसरे … Continue reading वे मुझ पर हँस रहे थे – रिज़वी

आज मेरी माहवारी का दूसरा दिन है – Damini Yadav

आज मेरी माहवारी का दूसरा दिन है। पैरों में चलने की ताक़त नहीं है, जांघों में जैसे पत्थर की सिल भरी है। पेट की अंतड़ियां… दर्द से खिंची हुई हैं। इस दर्द से उठती रूलाई जबड़ों की सख़्ती में भिंची हुई है। कल जब मैं उस दुकान में ‘व्हीस्पर’ पैड का नाम ले फुसफुसाई थी, सारे लोगों की जमी हुई नजरों के बीच, दुकानदार ने … Continue reading आज मेरी माहवारी का दूसरा दिन है – Damini Yadav

বন্যাদি তুমি শোন – Irfanul Rahman Rafin

ক্ষমা চাইবার ভাষা নেই আজ কোনো কিছু একটা তো বলতেই হয় তাই কানে কানে বলি বন্যাদি তুমি শোনো বোন পারুলের পাশে জেগে সাত ভাই জানি কেউ কেউ বলবে সে নাস্তিক আমি বলে দেবো সন্তান মোর মা’র দ্যাখা যাবে তারা নাকি নজরুল ঠিক খুন করে যারা নিয়ে নেয় দায়ভার তুমি বিশ্বাস করো না ওদের বাণী লাশ নিয়ে যারা পাশা খেলে অগোচরে বুলেট আর আগুন নিয়ে যেই … Continue reading বন্যাদি তুমি শোন – Irfanul Rahman Rafin