हर हर मोदी घर घर मोदी – Mayank Saxena

हर हर मोदी घर घर मोदी महंगी सब्ज़ी अरहर मोदी फेंके लंबी टर टर मोदी कहते अफसर सर सर मोदी रोये जनता पत्थर मोदी दंगा होता बर्बर मोदी बोले झूठ है बम्पर मोदी विरोधियों का हंटर मोदी आर एस एस का पंटर मोदी सच से कांपे थर थर मोदी अब गरीब से डर डर मोदी घूमे दुनिया जी भर मोदी पर हो गूंगा घर पर … Continue reading हर हर मोदी घर घर मोदी – Mayank Saxena

दादरी का अख़लाक़ – राजेश जोशी की कविता

“दादरी का अख़लाक़” हर हत्या के बाद ख़ामोश हो जाते हैं हत्यारे और उनके मित्रगण. उनके दाँतों के बीच फँसे रहते हैं ताज़ा माँस के गुलाबी रेशे, रक्त की कुछ बूँदें भी चिपकी होती हैं होंठों के आसपास, पर आँखें भावशून्य हो जाती हैं जैसे चकित सी होती हों धरती पर निश्चल पड़ी कुचली-नुची मृत मानव देह को देखकर हत्या के बाद हत्यारे भूल जाते … Continue reading दादरी का अख़लाक़ – राजेश जोशी की कविता

Turned out you were just like us: Fahmida Riaz tells Indians

As India basks under the glory of unchecked hate-crimes, it is time to remember the lines of Pakistani female poet Fahmida Riaz, who warned about such scenario long ago. The video of Fahmia Riaz herself reciting this poem can be seen below: तुम बिल्कुल हम जैसे निकले तुम बिल्कुल हम जैसे निकले अब तक कहां छुपे थे भाई? वह मूरखता, वह घामड़पन जिसमें हमने सदी … Continue reading Turned out you were just like us: Fahmida Riaz tells Indians

ओ भगत सिंह दीवाने – Pankaj Srivastava

शहीद-ए-आज़म भगत सिंह के जन्मदिन समारोह की तैयारियों के बीच इंकलाबी सलाम के साथ पेश है एक गीत — ओ भगत सिंह दीवाने —————————— ओ भगत सिंह दीवाने आज़ादी के परवाने तेरा हैट चुरा के पंडे लगे पगड़ी हैं पहनाने लो अँगड़ाई एक बार फिर, करो लड़ाई पूरी क्योंकि…. ये चोरों का राज है, लुटेरों का राज है ! खून पीने वालों के सर सजा … Continue reading ओ भगत सिंह दीवाने – Pankaj Srivastava

गीतकार शैलेंद्र का जन्मदिन – Rakesh Kayasth

आज महान गीतकार शैलेंद्र का जन्मदिन है। अपने 43 के छोटे जीवन में लगभग 800 बेहतरीन फिल्मी गीत लिखने वाले शैलेंद्र सिनेमा की दुनिया में हिंदी के सबसे बड़े प्रतिनिधि थे। प्रेमचंद से लेकर मनोहर श्याम जोशी तक हिंदी के ना जाने कितने लेखकों और कवियों ने मायानगरी से नाता जोड़ा, लेकिन इनमें से ज्यादातर लोग लंबे समय तक टिक नहीं पाये। लेकिन शैलेंद्र इकलौते … Continue reading गीतकार शैलेंद्र का जन्मदिन – Rakesh Kayasth

यह देश है कि भीड़? – कविता

भीड़ के ख़तरों को तुम नहीं जानते भीड़ सुनती है सिर्फ लाउडस्पीकर को भीड़ सच नहीं सुनती भीड़ सुन नहीं सकती कैसे सुन सकता है कोई साफ-साफ किसी शोर को भीड़ आती है किसी बांध के टूटने के सैलाब सी भीड़ विपदा होती है जो गिर पड़ती है मनुष्यता पर जिसे रोका जा सकता है सिर्फ मनुष्य हो कर भीड़ बड़ी कारगर है मंदिरों-मस्जिदों-गिरजों-गुरुद्वारों में … Continue reading यह देश है कि भीड़? – कविता

देखो कितनी भ्रष्ट महिला है. . .

देखो कितनी भ्रष्ट महिला है. . . करोड़ों रुपयों का सूट पहने, बड़े बड़े पूंजीपतियों के साथ उठने बैठने वाली, पांच सितारा होटल में खाने वाली, मंहगे मोबाइल से  सेल्फ़ी लेने वाली, शराब के नशे में चूर, अब किसी भी तरह इस भ्रष्ट महिला को रोका जाय, सीबीआई द्वारा हिरासत में ले लिया जाय क्योंकि उसने 117 हत्यारों को जेल भिजवाने के बाद 27 जुलाई … Continue reading देखो कितनी भ्रष्ट महिला है. . .

Tagore, Nationalism and National Anthem – Sangeeta Bodhi Das

Do you like poetry and songs? If you don’t like a particular word or phrase in a poem or a song, what do you do? In all probability you would say that you don’t like the poem/song or don’t approve of it. Would you ask the poet, please remove that word, because I don’t like it? Yes you can do it when you are an … Continue reading Tagore, Nationalism and National Anthem – Sangeeta Bodhi Das