हर युग में सिर्फ़ धंधा चला रहे थे
कुछ लोग हैं जिनका धंधा चलता ही रहा है. हर युग में सिर्फ़ धंधा चला रहे थे कोई आये कोई जाए, आँखों के सामने अत्याचार होता रहा मगर वो सोता रहा, धंधा जागता रहा यूनानी, मंगोल, अफ़ग़ान, मुग़ल, पुर्तगाली, फ़्रांसिसी, ब्रिटिश आज़ादी से पहले, आज़ादी के बाद बस धंधा चलता रहा उसने सिकंदर के फौजियों का भी उसी उत्साह से स्वागत किया जितना दांडी मार्च … Continue reading हर युग में सिर्फ़ धंधा चला रहे थे