हर युग में सिर्फ़ धंधा चला रहे थे

कुछ लोग हैं जिनका धंधा चलता ही रहा है. हर युग में सिर्फ़ धंधा चला रहे थे कोई आये कोई जाए, आँखों के सामने अत्याचार होता रहा मगर वो सोता रहा, धंधा जागता रहा यूनानी, मंगोल, अफ़ग़ान, मुग़ल, पुर्तगाली, फ़्रांसिसी, ब्रिटिश आज़ादी से पहले, आज़ादी के बाद बस धंधा चलता रहा उसने सिकंदर के फौजियों का भी उसी उत्साह से स्वागत किया जितना दांडी मार्च … Continue reading हर युग में सिर्फ़ धंधा चला रहे थे

मुर्दों के खिलाफ – Mayank Saxena

कुछ लोग ज़िंदा थे कुछ लोग थोड़ा कम ज़िंदा कुछ थोड़ा ज़्यादा ज़िंदा इन बहुत थोड़े लोगों के इर्द गिर्द इकट्ठा थे बहुत सारे मुर्दा लोग कुछ मुर्दा कुछ थोड़े कम मुर्दा कुछ… थोड़े ज़्यादा मुर्दा ज़िंदा लोग बहुत ज़्यादा ज़िंदा लोग थोड़ा कम ज़िंदा लोग लड़ते रहे मुर्दा होने तक मुर्दों के खिलाफ ज़िंदगी भर लगे रहे मुर्दों को जिलाने में कुछ को कम … Continue reading मुर्दों के खिलाफ – Mayank Saxena

तुम आती हो तो चेहरे पर रंग आता है – Mayank Saxena

तुम… तुम आई थी सर्दी सी याद है न फिर तुम ही बन गई थी गुगुनी धूप और फिर कभी तेज़ धूप सी पसीना छलछलाती कभी आफ़ताब सी चमकती पहली बौछार सी गिरती-भिगोती बिजली सी आंखों में झपकती तुम आई थी न फूलों के मौसम में शाखों पर सब्ज़ रंग पर चटख लाल तुम्हें याद होगा पहाड़ के पीछे से उगती डूबती गहरे समंदर में … Continue reading तुम आती हो तो चेहरे पर रंग आता है – Mayank Saxena

मैं वो सब नहीं जो तुम मुझको अब तक समझते रहे – Ila Joshi

मैं कोई मिट्टी नहीं, जो रौंदी जाएगी तुम्हारे जूतों के तले, जिसे काटेंगे तुम्हारे ताने बाड़ के पानी की तरह… न हूँ मैं कोई कली, जिसे जब चाहो तुम मसल दो अपने बिस्तर की सिलवटों में, या लपेट लो अपनी कलाई में किसी गजरे की तरह… मैं कोई आंसू नहीं, जो बस यूँही बह जाए एक आँख के कोने से, या तुम्हारे दिए ज़ख्मों पर … Continue reading मैं वो सब नहीं जो तुम मुझको अब तक समझते रहे – Ila Joshi

A Tribute to Vina Mazumdar – Urvashi Butalia

They don’t make them like her any more It’s a very particular kind of recipe You’d need an enlightened father You’d need a visionary mother It would help if you had an educated book loving driver You’d need friends scattered all over the world They’d have to be doctors and feminists and academics and activists You’d need a good dose of children You’d have to … Continue reading A Tribute to Vina Mazumdar – Urvashi Butalia

ज़मानत मंज़ूर – शाहनवाज़ मलिक

क्रॉर्फ्ड बाज़ार बंद हो चुका था लेकिन बशीर मियां की ज़िंदा मछलियों को अभी तक खरीदार नहीं मिला था। उन्हें औने-पौने दाम पर बेचकर दुकान समेटने की बजाय बशीर मियां ने मछलियों को गले में टांगा और पास की बस्ती में निकल गए। चूंकि सारी मछलियां वाजिब कीमत पर बिक गईं, इसलिए बताना मुश्किल था कि बशीर कितने खुश हैं। क्रॉर्फ्ड बाज़ार में वो उनका … Continue reading ज़मानत मंज़ूर – शाहनवाज़ मलिक

The books that changed our lives

Six leading feminists recall the writing that first opened their eyes to the women’s movement (Exemplary inspirations … (left to right) Kate Millett, Virginia Woolf, Naomi Wolf. Photographs: Guardian/Corbis) Jessica Valenti When I first saw my mother’s copy of Naomi Wolf’s The Beauty Myth: How Images of Beauty are Used Against Women, I remember being a little afraid of the cover, which featured a picture … Continue reading The books that changed our lives

Remembrance: Maya Angelou

(Maya Angelou) अनुवाद: खुर्शीद अनवर तुम्हारे हाथ मेरी जुल्फों पे बेख़ौफ़ रवां शहद की मक्खी की मानिंद बने छत्तों में मेरे रुखसार की हर साख्त पे मुस्काते है कभी तो जिस्म पे मेरे मचलते जाते हैं कभी दमक कभी सरगोशी से इज़हार के साथ रहस्य का जाल मेरे तर्कों पे छा जाता है बलात्कार का एह्सास सा दिलाता है जिस घड़ी खुद को और अपने … Continue reading Remembrance: Maya Angelou

एक बेचैन पत्‍नी का आत्‍म विलाप – Manisha Pandey

जब से सुहासिनी आई है, आभा बेचैन रसोई से कमरे और कमरे से रसोई में फिरकी सी डोल रही है। रसोई में होती है तो भी कान लगाए रहती है कि आशु इसे गुपचुप क्‍या पढ़ा रहा है। कहीं मेरे बारे में तो बात नहीं कर रहे हैं। सब्‍जी काटते, दाल छौंकते, चावल बीनते उसके कान इधर ही जमे रहते हैं। पता नहीं, दोनों आपस … Continue reading एक बेचैन पत्‍नी का आत्‍म विलाप – Manisha Pandey

वो कहते हैं – Ila Joshi

तुम्हारी उम्र और शरीर में है दो दशकों का अंतर… मानो उम्र ने भी तुम्हारे चेहरे पर दस्तक तुम्हारे जन्म के समय ही दे दी.. (उन सभी लड़कियों को समर्पित जिन्हें अक्सर ये उलाहना दिया जाता है कि तुम उम्र से बड़ी दिखती हो, उन्हें क्या मालूम तुम्हारे किन-किन अनुभवों ने तुमको उम्र से कहीं पहले बड़ा कर दिया…) Continue reading वो कहते हैं – Ila Joshi