यही वे हाथ हैं जो इम्तियाज़ हैं – नाचीज़

David Cuttingham   कुछ हाथ हैं सुर्ख सफेद कुछ हाथ दराज हैं दस्‍त दराज हैं कुछ हाथ हैं गंदे मटमैले कुछ हाथ फराज हैं, सरफराज हैं कुछ हाथ हैं खून से रंगे हुए कुछ हाथ हैं अंधेरा बुन रहे कुछ हाथ हैं उनके साथ हैं कुछ हाथ हैं अंधेरा सहेज रहे कुछ हाथ हैं उनके पासबान हैं कुछ और भी हाथ हैं अंधेरे के ये … Continue reading यही वे हाथ हैं जो इम्तियाज़ हैं – नाचीज़

प्रस्तावना (मैं टोपी शुक्ला)

प्रस्तावना (मैं टोपी शुक्ला)***************हम सबके भीतर एक टोपी शुक्ला है…टोपी जो हिंदू है पर मुसलमानों का पक्का यार है, ये अलग बात है कि वो उनकी बहुत सी बातों से चिढ़ता है क्योंकि ये मुल्क चिढ़ता है…वो उनसे दूर भी नहीं जा पाता है लेकिन पास रहने के लिए पछताता भी है क्योंकि मुल्क ऐसा मानता है कि बंटवारा उन्होंने करवा दिया…वो अपनी दादी से … Continue reading प्रस्तावना (मैं टोपी शुक्ला)

आग जलती रहे- दुष्यंत कुमार (Dushyant Kumar)

    एक तीखी आँच ने इस जन्म का हर पल छुआ, आता हुआ दिन छुआ हाथों से गुजरता कल छुआ हर बीज, अँकुआ, पेड़-पौधा, फूल-पत्ती, फल छुआ जो मुझे छुने चली हर उस हवा का आँचल छुआ … प्रहर कोई भी नहीं बीता अछुता आग के संपर्क से दिवस, मासों और वर्षों के कड़ाहों में मैं उबलता रहा पानी-सा परे हर तर्क से एक … Continue reading आग जलती रहे- दुष्यंत कुमार (Dushyant Kumar)

मकान – कैफी आजमी

  आज की रात बहुत गरम हवा चलती है आज की रात न फुटपाथ पे नींद आयेगी । सब उठो, मैं भी उठूँ, तुम भी उठो, तुम भी उठो कोई खिड़की इसी दीवार में खुल जायेगी । ये जमीन तब भी निगल लेने पे आमादा थी पाँव जब टूटी शाखों से उतारे हम ने । इन मकानों को खबर है ना मकीनों को खबर उन … Continue reading मकान – कैफी आजमी

सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है – Ram Prasad Bismil

    सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है जोर कितना बाजुए कातिल में है । करता नहीं क्यों दुसरा कुछ बातचीत, देखता हूँ मैं जिसे वो चुप तेरी महफिल मैं है । रहबर राहे मौहब्बत रह न जाना राह में लज्जत-ऐ-सेहरा नवर्दी दूरिये-मंजिल में है । यों खड़ा मौकतल में कातिल कह रहा है बार-बार क्या तमन्ना-ए-शहादत भी किसी के दिल … Continue reading सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है – Ram Prasad Bismil

जो पुल बनाएंगे बन्दर कहलाएंगे – अज्ञेय

  जो पुल बनाएंगे वे अनिवार्यत: पीछे रह जाएंगे। सेनाएँ हो जाएंगी पार मारे जाएंगे रावण जयी होंगे राम, जो निर्माता रहे इतिहास में बन्दर कहलाएंगे Continue reading जो पुल बनाएंगे बन्दर कहलाएंगे – अज्ञेय

बहुत सारे फिलिस्तीन हैं और इस्राईल भी बहुत हैं – Himanshu Kumar

  बहुत सारे फिलिस्तीन हैं और इस्राईल भी बहुत हैं असल में हम सब के भीतर इस्राईल भी है और फिलिस्तीन भी दुनिया में कितनी ही बार मार डाले गए कमज़ोर जैसे फिलिस्तीन में मारे जा रहे हैं अभी अभी भारत में भी एक फिलिस्तीन है जहां बच्चों के हाथ काटते हैं हमारे सिपाही जहां के खनिज लूट कर झोंके जाते हैं अमीरों के कारखानों … Continue reading बहुत सारे फिलिस्तीन हैं और इस्राईल भी बहुत हैं – Himanshu Kumar

अधूरा कोई नहीं – आर. अनुराधा

      सुनती हूं बहुत कुछ जो लोग कहते हैं असंबोधित कि अधूरी हूं मैं- एक बार अधूरी हूं मैं- दूसरी बार क्या दो अधूरे मिलकर एक पूरा नहीं होते? होते ही हैं चाहे रोटी हो या मेरा समतल सीना और अधूरा आखिर होता क्या है! जैसे अधूरा चांद? आसमान? पेड़? धरती? कैसे हो सकता है कोई इंसान अधूरा!   जैसे कि केकड़ों की … Continue reading अधूरा कोई नहीं – आर. अनुराधा

तुम्हारी दीवार कितनी लम्बी है?- Mayank Saxena

        तुम्हारी दीवार कितनी लम्बी है? कितने किलोमीटर लम्बी है ये दीवार क्या कहा कोई 700 किलोमीटर लम्बी तो कितना लगा होगा इसमें सीमेंट कितनी ईंटें कितना लोहा कितने लोग और कितना पैसा कितना ख़ून, ये मत बताना हमारा बहा है, सो हम जानते हैं किसी से भी बेहतर कितने किलोमीटर लम्बी है ये दीवार क्या कहा…कोई 700 किलोमीटर लम्बी? जिसको तुम … Continue reading तुम्हारी दीवार कितनी लम्बी है?- Mayank Saxena

बरसात – कँवल भारती

      (दिलीप मंडल को पढ़ने के बाद) दो किस्म के लोग होते हैं, एक वे जो मानसून के आगे-आगे भागते हैं दूसरे वे जो रोज मानसून में भीगते हैं, पहले किस्म के लोग आनंद लेते हैं मानसून का चाय-पकौड़ों के साथ दूसरे भीगते हैं पेट की आग बुझाने के लिए. हम एक को कह सकते हैं पेट-भरे लोग, और दूसरे को खाली पेट … Continue reading बरसात – कँवल भारती