IBN- E- Rukmini (Rukmini Sen)

Some of my fondest memories revolve around my father. A man of 79 years. He is quite a life traveller. Needless to say he was my first liberal influence. However, politically I don’t always agree with him. Over the years I have realised my politics is different from my family’s. But my father truly ‘loves’ me…of whatever I understand of that word…he stretches himself to accomodate … Continue reading IBN- E- Rukmini (Rukmini Sen)

Not Anti-Semitic. We are Anti-Zionist & Anti-Fascism (यहूदियों के खिलाफ नहीं फासीवादी विचारधारा ज़ियनवाद के मुखालिफ हैं) – Khursheed Anwar

हम यहूदियों के खिलाफ नहीं फासीवादी विचारधारा ज़ियनवाद के मुखालिफ हैं इस्राइल और जियनवाद के बारे में दस जरूरी बातें 1. सामी विरोध एक नस्लवादी विचारधारा है जिसके निशाने पर यहूदी होते हैं। समाज में उसकी आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक और मनोवैज्ञानिक जड़ों के खिलाफ संघर्ष जरूरी है। 2. जियनवाद-विरोध दरअसल जियनवादी आन्दोलन के खिलाफ संघर्ष है। जियनवाद एक ऐसा आन्दोलन है जिसका उद्गम 19वीं सदी … Continue reading Not Anti-Semitic. We are Anti-Zionist & Anti-Fascism (यहूदियों के खिलाफ नहीं फासीवादी विचारधारा ज़ियनवाद के मुखालिफ हैं) – Khursheed Anwar

वहाबी इस्लाम (Wahabi Islam- Khursheed Anwar)

मैं कोई धर्म नहीं मानता. नास्तिक हूँ. पर जब देखता हूँ कि हर रोज खून का खेल खेलते हैं यह आतंकी तो एक बात दुहराना चाहता हूँ .मैं कहता आया हूँ कि समझने की ज़रूरत है आतंकवाद को जिसे आम बोल चाल में “इस्लामी आतंकवाद” कहा जाता है. इस्लाम नहीं है और इनके निशाने 99 फीसद इस्लाम के अनुयायी हैं. वहाबी इस्लाम केवल एक मात्र … Continue reading वहाबी इस्लाम (Wahabi Islam- Khursheed Anwar)

चम्पादक-मालिक संवाद (Mayank Saxena)

चम्पादक कमोड पर बैठे थे, सिगरेट अर्से पहले छोड़ दी थी सो प्रेशर बनने और क्लीयर होने दोनों में वक़्त लगता था…ताकत लगा कर पिछली रात के सारे पैकेज गिरा रहे थे, तभी अचानक फोन पर तबला और सारंगी बज उठे…जामुन (ब्लैकबेरी) हाथ में लिया सर पर दूसरा हाथ रखा…नम्बर के ऊपर नाम लिखा था…’सर’ सर यानी कि मालिक…फोन को कमोड में डाल कर पुराना … Continue reading चम्पादक-मालिक संवाद (Mayank Saxena)

National Conscience On Vacation Today- Dibyesh Anand (Translated by Khurshid Anwar)

राष्ट्र की जनभावना आज छुट्टी पर है साझी सामूहिक भावना है हिन्दुस्तानी कौम की अवकाश लिए मदमस्त सी है बल्ले और गेंद में डूबी है इरोम शर्मिला जांबाज़, बहादुर, गरिमामय अब तेरह बरस के अरसे से इस मुल्क के हाकिमों के हाथों जबरन खिलवाई जाती है वह औरत जिसने जंग छेड़ी कानून के और फौजों के विरुद्ध साज़िश के नकाबें धज्जी कीं कानून ने जिन … Continue reading National Conscience On Vacation Today- Dibyesh Anand (Translated by Khurshid Anwar)

HEAR ME ROAR- मेरा गरजना तो सुनो – गेब्रेला गनाओ (अनुवाद खुर्शीद अनवर )

एक औरत हूँ मैं तुम मेरा गरजना  तो सुनो अपने माज़ी का तकाज़ा, न बहाना  कोई अपने संघर्ष का अम्बार खुद  आँखों के  तले और  गर्दन में सफलता की पताका डाले एक औरत हूँ मैं तुम मेरा गरजना  तो सुनो मैं भी हिलने की नहीं मैं भी अब रोज़ा पार्क्स मैं यहीं हूँ, मुझे क्या तुम् रहो या हट जाओ किसी धमकी किसी आवाज़ की … Continue reading HEAR ME ROAR- मेरा गरजना तो सुनो – गेब्रेला गनाओ (अनुवाद खुर्शीद अनवर )

Still I Rise – फिर से उठती मैं हूँ खुद अपनी बुलंदी बनकर (माया एंजिलो )

झूट और मक्र की चादर में लिटा कर मुझको ग़र्क करदो मुझे इतिहास के पन्नो अभी रौंद कर क़दमो तले धूल बना दो मुझको जिस तरह धूल उठे मैं भी उठूँगी फिर से तुम मेरे अज़्म से बतलाओ कि डरते क्यों हो ? इतने नाशाद हो क्यों इतने परेशां क्यों हो ? ‘क्योंकि हर एक कदम मेरा बताता है तुम्हे जैसे मैं तेल का एक … Continue reading Still I Rise – फिर से उठती मैं हूँ खुद अपनी बुलंदी बनकर (माया एंजिलो )

कमल – Kishore Jha

मेरा काम कुछ ऐसा है कि अक्सर सफ़र में रहता हूँ और स्टेशन पर आना-जाना लगा रहता है. पर इतने सालों बाद भी स्टेशन से मोहब्बत नहीं हो पाई और वहां हमेशा कुछ बेचैनी सी महसूस होती है. गाड़ी से उतर के घर पहुचने की बेताबी रहती है और स्टेशन से बाहर आकर पहली चुनौती होती है एक ऑटो पकड़ना जो आपको घर तक ले … Continue reading कमल – Kishore Jha

अक्सर अकेले में ढुंढती हूँ

अक्सर अकेले में ढुंढती हूँ, उन छः महीनों का हाल, बस खुद को यकीं दिलाने को, के हाँ, शायद मैं बचा सकती थी तुम्हें…. खंगालती हूँ अपने दिमाग का हर इक कोना, याद करने को उस ताले का नंबर, जिसमे छुपाये तुम्हारी डायरी के कुछ पन्ने, शायद अभी भी इंतजार करते होंगे मेरा… तुम्हारी काबिलियत पर कभी भी, शक न था मुझे, तभी तो आज … Continue reading अक्सर अकेले में ढुंढती हूँ