ढलती शामों की घडी का मेरा फैला आकाश – पाब्लो नेरुदा
वापस फिर पाब्लो नेरुदा की तरफ ———————— ढलती शामों की घडी का मेरा फैला आकाश पाब्लो नेरुदा अनुवाद: खुर्शीद अनवर ढलती शामों की घडी का मेरा फैला आकाश उसपे छाई हो ऐसे कोई बादल जैसे तुम मेरी ज़ात हो, मेरी हो ऐ नाज़ुक लब जाँ और तेरी ज़ात में शामिल मेरे खवाबों के जहां रौशनी रूह की मेरे, तेरे क़दमों में ढले यूँ उतर जायें … Continue reading ढलती शामों की घडी का मेरा फैला आकाश – पाब्लो नेरुदा