ढलती शामों की घडी का मेरा फैला आकाश – पाब्लो नेरुदा

वापस फिर पाब्लो नेरुदा की तरफ ———————— ढलती शामों की घडी का मेरा फैला आकाश पाब्लो नेरुदा अनुवाद: खुर्शीद अनवर ढलती शामों की घडी का मेरा फैला आकाश उसपे छाई हो ऐसे कोई बादल जैसे तुम मेरी ज़ात हो, मेरी हो ऐ नाज़ुक लब जाँ और तेरी ज़ात में शामिल मेरे खवाबों के जहां रौशनी रूह की मेरे, तेरे क़दमों में ढले यूँ उतर जायें … Continue reading ढलती शामों की घडी का मेरा फैला आकाश – पाब्लो नेरुदा

कमला नगर दोस्तों को एक आमंत्रण (Kishore Jha)

वर्षों पुरानी आंटे की चक्की और पहलवान की दूकान अब नहीं रहे वक़्त का अहसास कराने वाला बिड़ला मिल का सायरन भी अब नहीं बजता बिड़ला मिल की तरह गणेश मिल और न जाने कितनी मिलों पर ना जाने कब से ताला लटका है   घंटा घर से चांदनी चौक तक चलता तांगा अब शायद ही दिखे पर साठ के दशक में चलने वाली ट्राम … Continue reading कमला नगर दोस्तों को एक आमंत्रण (Kishore Jha)

दंगा – मयंक सक्सेना ( Mayank Saxena)

दंगा *************** रात अंधेरा सन्नाटा शोर भीड़ आग चीखें … नारे चीखें आग ऱोशनी फिर रात अंधेरा सन्नाटा ********************* मयंक सक्सेना (4 मई, 1.26am) Continue reading दंगा – मयंक सक्सेना ( Mayank Saxena)

वो कौन सी नस्ल है – Mayank Saxena

    हमारे भीतर आग है ऐसा हम कहते हैं और बाहर सन्नाटा जैसा दुनिया देखती है और फिर हम कहते हैं हम सही समय आने पर बोलेंगे समय…सही समय क्या वाकई कभी आता है या फिर समय आता नहीं लाया जाता है वो कौन सी समझदारी है जो चुप्पी को बरकरार रखती है वो कौन सा धैर्य है जो आग को ठंडा नहीं होने … Continue reading वो कौन सी नस्ल है – Mayank Saxena

मैं एक एजेंट की बेटी हूं – Mayank Saxena

हां मैं एक एजेंट की बेटी हूं मेरा बाप एक खुफिया एजेंट था एक मेरे देश से दूसरे देश में भेजा गया था जासूसी करने के लिए वो पढ़ा लिखा नहीं था ज़्यादा उसे सिर्फ इतना पता था कि उसका एक देश है और वो उसके गांव में बिजली, नौकरी और रोटी नहीं दे पाता है वो देश उसे मौका दे रहा है देश सेवा … Continue reading मैं एक एजेंट की बेटी हूं – Mayank Saxena

One Billion and Something – Parvez Imam

“We are a billion”, one day, they said. “Celebrations… Power to the people, the largest democracy”, they said. Then the figures moved ahead “We are one billion and something”, they said. From the start, ‘something’ is doing fine While one billion still walk the line And wonder where do they stand? The ‘power of people’, a mere vote bank From where draws ‘something’ whenever they … Continue reading One Billion and Something – Parvez Imam

জিজেকের ভায়োলেন্স: পুঁজিবাদী সমাজে বলপ্রয়োগের নতুন বিন্যাস – লেভিন আহমেদ (Levin Ahmed)

    বলপ্রয়োগ কথাটি কিভাবে আমাদের মনোজগতে ভেসে ওঠে — এই প্রশ্ন দিয়ে শুরু করা যাক। নিশ্চয় বলপ্রয়োগ সন্ত্রাস, সহিংসতা, খুন, উদ্বেগ ও টানটান উত্তেজনার মিশ্র আবহ নিয়ে আমাদের সামনে হাজির হয়। জিজেকের মতে, ঠিক এখানেই পহেলা বিপত্তি ঘটার সম্ভাবনা; তাই এক কদম পিছিয়ে বুঝে শুনে তারপর অগ্রসর হওয়া জরুরি মনে করেন তিনি। ব্যক্তির বলপ্রয়োগ ও সহিংস কর্মকাণ্ডের তাৎক্ষণিক প্রতিক্রিয়া এড়িয়ে পেছনের দিগন্তকে — যেখান … Continue reading জিজেকের ভায়োলেন্স: পুঁজিবাদী সমাজে বলপ্রয়োগের নতুন বিন্যাস – লেভিন আহমেদ (Levin Ahmed)

क्यूंकि तब, ठहर जायेगी तुम्हारे मस्तिष्क की नदी – ILA JOSHI

अपेक्षाओं की इस उठापटक के बीच, क्यूँ तोड़ रहे हो अपने दिल-ओ-दिमाग के बीच बना वो पुल… … अगर कहने और चाहने से, समझती ये दुनिया, सब कुछ थमा रह जाता, न होते तुम यूँ व्याकुल… मत चाहो के सुलझ जाएँ, तुम्हारी सारी उलझनें, कुछ नया और अलग न होगा फ़िर, न नया जन्म, न मौसमों का बदलना, धूप के बाद छाँव का आना, आंसुओं … Continue reading क्यूंकि तब, ठहर जायेगी तुम्हारे मस्तिष्क की नदी – ILA JOSHI

फिर भी तुम से ज़्यादा ज़िंदा है – Mayank Saxena

गिरी है लाश उनकी, फिर भी तुम से ज़्यादा ज़िंदा है कि उनकी सिसकियों को भी ज़माना याद रखेगा तुम्हें शक है कि तुम बोलोगे न, न कोई देखेगा तुम्हारी चुप्पियों को भी ज़माना याद रखेगा ………………………………………………… जा रहा हूं लौट कर आऊंगा यूं तो नहीं होता है हमेशा जाना लौट आने के लिए … लेकिन तय कर लो कि लौटना है लौटना है कुछ … Continue reading फिर भी तुम से ज़्यादा ज़िंदा है – Mayank Saxena