डियर डोनल्ड तुम्हारा, उड़ता उड़ेंद्र – Nitin Thakur

डियर डोनल्ड, जब ये खत तुम्हें मिलेगा तब मैं शायद नीदरलैंड्स के प्रधानमंत्री रूट के गले पड़ रहा हूंगा…. वो.. मेरा मतलब.. गले लग रहा हूंगा। भले ही मैं अमेरिका से निकलकर अब समंदर के ऊपर हवा में हूं लेकिन मेरा दिल वहीं व्हाइट हाउस के किसी कोने में ठहर गया है। कितना सुखद था तुमसे और मेलानिया भाभी से मिलना!!! उन्होंने कल रात जिस … Continue reading डियर डोनल्ड तुम्हारा, उड़ता उड़ेंद्र – Nitin Thakur

इंदिरा दुर्गा और नेहरू खलनायक क्यों? – Rakesh Kayasth

  देश के इतिहास में संघियों के पिटने और जेल जाने की अगर कोई वाकया है, तो वह सिर्फ इमरजेंसी के दौर का है। लिखित माफी की भी कुछ कहानियां हैं। लेकिन यह सच है कि समाजवादियों के साथ संघियों ने भी इमरजेंसी के दौरान इंदिरा सरकार की प्रताड़ना सही। इतिहास बोध आजकल एक विलुप्तप्राय चीज़ है। लेकिन पुराने पत्रकारों से बात कीजिये तो पता … Continue reading इंदिरा दुर्गा और नेहरू खलनायक क्यों? – Rakesh Kayasth

गांधी, चार्ली, चर्चिल और मशीन -3 (Nitin Thakur)

1931 में जब चार्ली चैप्लिन गांधी से मिल रहे थे तब उन्हें बाज़ार में बढ़ते मशीनीकरण के नुकसानों का उतना अंदाज़ा नहीं था। दुनिया बहुत तेज़ी के साथ मशीनों पर निर्भर होती जा रही थी। पहले विश्वयुद्ध के बाद बर्बाद हुए देश तेज़ी से खड़े होने के लिए मशीनों पर सवार थे और जर्मनी उनमें सबसे आगे था। अंग्रेज़ों ने भी मैनचेस्टर में मशीनों से … Continue reading गांधी, चार्ली, चर्चिल और मशीन -3 (Nitin Thakur)

गांधी, चार्ली, चर्चिल और मशीन -2 (Nitin Thakur)

चार्ली चैप्लिन महात्मा गांधी से मिलना चाहते थे जिसके लिए कैनिंग टाउन में डॉक्टर चुन्नीलाल कतियाल के यहाँ 22 सितम्बर 1931 की शाम का वक्त तय हुआ। खुद चैप्लिन ने इस रोचक मुलाकात को आत्मकथा में सहेजा है। उस वक्त का एक फोटो रिकॉर्ड्स में मिलता है जिसमें गांधी गाड़ी से बाहर आ रहे हैं और उन्हें लोगों ने चारों तरफ से घेर रखा है। … Continue reading गांधी, चार्ली, चर्चिल और मशीन -2 (Nitin Thakur)

गांधी, चार्ली, चर्चिल और मशीन -1 ( Nitin Thakur)

साल 1936 में जर्मनी ओलंपिक खेलों का मेजबान था। एडोल्फ हिटलर के लिए ये मौका था जब वो दिखा सकता था कि अट्ठारह साल पूर्व पहली आलमी लड़ाई में हार चुका जर्मनी फिर से उठ खड़ा हुआ है। इन खेलों के सहारे वो जर्मनों की शर्मिंदगी को आत्मविश्वास में तब्दील कर डालना चाहता था। उसने टीवी नाम की मशीन का इस्तेमाल किया और पहली बार … Continue reading गांधी, चार्ली, चर्चिल और मशीन -1 ( Nitin Thakur)

एक बच्चा जिसे सब भूल जाते हैं- प्रदीप

  एक गड्ढा है जिसमें वह गिर गया है और उसके साथ जो आया है, वह रुकता नहीं उसके लिए. जैसे कई बार आपके सपने में होता होगा, आप गिरते चले जाते होंगे कहीं गहरे और चीख़ते होंगे लेकिन आवाज़…! वह तो अंदर ही कहीं गोल घूम कर रह गयी है. या फिर आपके जीवन में मौजूद आपसे सबसे ज़्यादा प्यार करने का दावा रखने … Continue reading एक बच्चा जिसे सब भूल जाते हैं- प्रदीप

आज देश किस आधार पर मान ले कि सीबीआई प्रधानमंत्री का तोता नहीं है? – Nitin Thakur

एनडीटीवी प्रमोटर पर छापे के दौरान ज़ी अजीब सी खुशी के साथ खबर चला रहा था. शायद उन्हें इस बात की शिकायत है कि जब उनकी इज्ज़त का जनाज़ा निकल रहा था तब उनका साथ किसी ने नहीं दिया. ज़ी का दर्द एक हद तक सही भी है. तब सभी ने चौधरी और अहलूवालिया का स्टिंग बिना ऐसे कुछ लिखे चलाया था कि “ये पत्रकारिता … Continue reading आज देश किस आधार पर मान ले कि सीबीआई प्रधानमंत्री का तोता नहीं है? – Nitin Thakur

Updated Statement From NDTV On CBI Raids

Communication | Updated: June 05, 2017 20:04 IST It is shocking that the CBI conducted searches on the NDTV offices and residence of the promoters without even conducting a preliminary enquiry. This is a blatant political attack on the freedom of the press as sources confirm that under pressure, the CBI has been compelled to file an FIR based on a shoddy complaint by a … Continue reading Updated Statement From NDTV On CBI Raids

Introducing #चचा_चक्रम और भगत

भगत – सही किया साले एनडीटीवी को पेल कर, बहुत एंटी मोदी हो रिया था!   चचा चक्रम – हां, रविशवा पापुलर भी बहुत हो गया है…निधि राजदान ने विलम्बित मात्रा को खदेड़ दिया…बहुत थूथू हो रई है मोदी और भगतों की…   भगत – हुंह, देखता ही कौन है एनडीटीवी…   चचा चक्रम – जब कोई देखता ही नहीं है, फिर काहे की दिक्कत…काहे … Continue reading Introducing #चचा_चक्रम और भगत