Author: Hillele.com
12 Cognitive Biases Explained – How to Think Better and More Logically Removing Bias
Jay Shetty: Choices that can change your life
Jay Shetty Interviews His Wife For The First Time | On Purpose Podcast Ep. 1
Important: Assam NRC- a humanitarian crisis looming large
“Citizenship is man’s basic right for it is nothing less than the right to have rights. Remove this priceless possession and there remains a stateless person, disgraced and degraded in the eyes of his countrymen”, once said Earl Warren, a prominent jurist. His words rightly sum up the fate of millions of residents in Assam whose names are excluded from the draft list of National … Continue reading Important: Assam NRC- a humanitarian crisis looming large
वो तय करेंगे- आप संदिग्ध हैं, देशद्रोही हैं-मसीहुद्दीन संजरी
लोकसभा चुनावों में 23 मई 2019 को भाजपा की प्रचंड जीत का एलान हुआ। आतंक की आरोपी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को भाजपा ने भोपाल सेअपना प्रत्याशी बनाया जिन्होंने कांग्रेस के नेता दिग्विजय सिंह को भारी मतों से पराजित कर कानून बनाने वाली देश की सबसे बड़ीपंचायत में पदार्पण किया। मोदी के दोबारा सत्ता में आने के साथ ही सरकार आतंकवाद पर ‘सख्त’ हो गयी। पहले से ही दुरूपयोग के लिए विवादोंमें रहे पोटा कानून के स्थान पर कांग्रेस सरकार ने 2004 में नए रूप में गैरकानूनी गतिविधियां (निरोधक) अधिनियम पेश किया था। प्रधानमंत्रीनरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक में इसी में दो और संशोधन लाने का फैसला किया गया। खबरों के अनुसार पहला संशोधन किसीव्यक्ति को आतंकवादी घोषित करने के लिए उसके किसी संगठन से जुड़े होने की बाध्यता को समाप्त करता है और दूसरा एनआईए को किसी भी व्यक्ति को आतंकी होने के संदेह पर गिरफ्तार करने की शक्ति प्रदान करता है। गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को तभी ज़मानत मिल सकती है जब वह खुद को अदालत में बेगुनाह साबित कर दे। अब तक एनआईए को किसी व्यक्ति को आतंकवादी साबित करने के लिए तमाम अन्य साक्ष्यों केअलावा उसके किसी आतंकी संगठन से जुड़ाव के सबूत भी अदालत को देने होते थे लेकिन अब उसे इस जंजाल से मुक्त कर दिया जाएगा। राजनीतिक उद्देश्यों और राजनेताओं के खिलाफ पोटा के दुरूपयोग के आरोपों के चलते 2004 में पोटा को खत्म कर 1967 में बने यूएपीए मेंआतंकवाद से सम्बंधित प्रावधानों को शामिल कर उसे नया रूप दिया गया था। शुरू में यूएपीए में शामिल आतंकवाद सम्बंधित पोटा के तीन कठोरप्रावधानों को शिथिल या खत्म कर दिया गया था। पोटा के अंतर्गत शामिल ज़मानत पाने के कड़े प्रावधानों को निकाल दिया गया था। पंद्रह दिनोंकी पुलिस हिरासत को हटा दिया गया था और पुलिस के सामने दिए गए बयान के अदालत में स्वीकार्य होने की बाध्यता खत्म कर दी गई थी।लेकिन बाद में होने वालो संशोधनों में इनमें से दो प्रावधानों को फिर से और कठोर बना दिया गया। पुलिस के सामने दिए गए बयान अब भीअदालतों में स्वीकार्य नहीं हैं लेकिन साथ में आरोपों को गलत साबित करने का बोझ कैद में जा चुके आरोपी पर होने और ज़मानत कीसंभावनाओं के खत्म हो जाने के बाद इस अस्वीकार्यता के बहुत मायने नहीं रह जाते। प्रस्तावित संशोधन में आतंकवाद पर प्रहार की बात की गईहै। हालांकि सच यह भी है कि यूएपीए के प्रावधानों का प्रयोग असहमति के स्वरों को कुचलने के लिए भी किया जाता रहा है। गत वर्ष दिल्लीऔर मुम्बई से अर्बन नक्सल के नाम पर प्रतिष्ठित सामाजिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों, कवियों, शिक्षक और वकीलों की गिरफ्तारियां इसी की ताजा कड़ी है। नए संशोधन के बाद आतंकवाद, … Continue reading वो तय करेंगे- आप संदिग्ध हैं, देशद्रोही हैं-मसीहुद्दीन संजरी
हमको कभी माफ़ मत करना, तबरेज़- Mayank Saxena
दो दिन हुए, तबरेज़ की पिटाई का वीडियो न जाने कितने ही लोगों ने भेजा…देखने की हिम्मत जुटाना मुश्किल था…और फिर आज एक दोस्त से बात हुई और वहां से जवाब आया, “मुसलमान के लिए अब इस मुल्क़ में कोई जगह नहीं…तुम लोग जो चाहें कोशिश कर लो, अब इस मुल्क़ के ज़्यादातर हिंदू, हमारे ख़िलाफ़ हैं…हम बस चुपचाप पंचर बनाते रहें और ज़िंदगी … Continue reading हमको कभी माफ़ मत करना, तबरेज़- Mayank Saxena
Must Watch : The real journalists behind “The Post”
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