उसमें बस एक दिक्कत थी। अंकल सरकारी नौकरी में थे…- Mayank Saxena

एक पुराने चावल (70+ अंकल) ने व्हॉट्सएप ग्रुप पर मास मैसेज किया कि किस तरह सरकारी कर्मचारी निकम्मे और चोर हैं। इसीलिए देश का बेड़ागर्क होता है, ये नौकरी की जगह हरामखोरी करते हैं और इसलिए सरकारी काम ठीक से नहीं होते। भ्रष्टाचार भी यही लोग करते हैं और इसीलिए देश की अर्थव्यवस्था का नाश हो रहा है। फिर अंकल ने बताया कि कैसे इसीलिए नौकरियों और सार्वजनिक उद्यमों का निजीकरण आवश्यक है और अडानी जैसे लोग देश की अर्थव्यवस्था में अहम योगदान देते हैं।

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अंकल का मैसेज बहुत प्रभावी था..उसमें बस एक दिक्कत थी। अंकल सरकारी नौकरी में थे..केंद्र सरकार में ग्रेड 2 अफ़सर। अंकल ने पूरी नौकरी की, अब पूरी पेंशन लेते हैं, सारे वेतन आयोग और महंगाई भत्ते समेत..बच्चे विदेश में हैं और अंकल नोएडा में बड़े से मकान में रहते हैं, महंगी गाड़ी से घूमते हैं। घर नौकरी में रहते बनाया था, कई सारे घर बनाए थे और आय से अधिक पैसा खर्च करके ही बनाए थे। उत्तर प्रदेश के हर बड़े शहर में अंकल का फ्लैट है…

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अंकल लिखते समय ये बता नहीं रहे थे, हालांकि ग्रुप में कई लोगों को ये बात पता थी। पर कोई बोला नहीं क्योंकि वो भी सब ज़्यादातर ऐसे ही अंकल थे..

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ख़ैर एक 35 साल वाले भतीजे से नहीं रहा गया। उसने पूछ लिया कि अंकिल आप तो सरकारी नौकरी में ही थे..

अंकल ने कहा – हां..

तो आप भी कामचोर थे? भ्रष्ट थे? निकम्मे थे?

अंकल – अरे सब थोड़े एक से होंगे..

भतीजे ने कहा – मतलब, आप ईमानदार थे बाकी सब बेईमान थे..

(उस ग्रुप में कई और थे और अंकल तो जानते ही थे..)

अंकल बोले – हमारे समय इतना करप्शन नहीं था..

भतीजे ने कहा – लेकिन तब तो कांग्रेस की सरकारें थी..

अंकल ने कहा – भई, सरकार कैसे मैनेज करे, पेंशन भी देनी होती है..महंगाई भत्ता भी..पूंजीपति न आए तो..

भतीजे ने कहा – लेकिन अंकल आपको भी तो वही सरकार दे रही है..

अंकल – हां, लेकिन अब हमारी तो पुरानी स्कीम है न..

भतीजा – तो आप पुरानी पेंशन स्कीम के समर्थन में हैं..

अंकल – नहीं, नई लागू होनी चाहिए..

भतीजा – तो आपकी भी नई के हिसाब से जोड़ कर, एडजस्ट कर के कर दी जाए?

अंकल – ऐसे कैसे…

भतीजा – क्यों, हो जाएगी..मैं कैलकुलेट कर के बताता हूं कि कैसे होगा, सरकार कर सकती है

अंकल – अरे कैलकुलेट तो हम भी कर लेंगे लेकिन

भतीजा – लेकिन क्या?

अंकल – ऐसे तो पेंशन कम हो जाएगी, बल्कि बंद ही हो जाएगी..

भतीजा – तो आपको पूरी बढ़िया पेंशन मिले और बाकी को कम…

अंकल – नहीं, इसमें भी शेयर मार्केट में पैसा लगेगा और..

भतीजा – अंकल, आपके पास कितने फ्लैट हैं..आप बता रहे थे 8 के आस-पास..

अंकल – हां तो..कहना क्या चाहते हो..

भतीजा – नहीं-नहीं, पैसा तो वो सारा सैलरी और मेहनत का ही होगा लेकिन आपने शेयर मार्केट में इनवेस्ट क्यों नहीं किया?

अंकल – अरे आदमी रियल इस्टेट में लगाता है क्योंकि वहां स्टेबिलिटी है और शेयर मार्केट गिर भी सकता है..तो वहां तो लगाना और निकालना होता है टाइम पर..

भतीजा – तो अंकल सरकारी कर्मचारी की पेंशन का पैसा, शेयर मार्केट में लगा दिया जाए…

अंकल – देखो, समझो..ऐसा है कि

भतीजा – क्या? मोदीजी ने किया है तो कुछ सोच के ही किया होगा?

अंकल – अरे बिल्कुल..

भतीजा – अंकल, जो लोग शेयर मार्केट में दूसरों का पैसा लगाकर, उस पर निगाह रखते हैं और सही समय पर निकालते-डालते हैं..उनको क्या कहते हैं..

अंकल – अरे..ब्रोकर..

भतीजा – हिंदी में क्या क्या कहते हैं?

अंकल – कहना क्या चाहते हो..

भतीजा – हिंदी में बताइए..

अंकल – अरे दलाल कहते हैं..और क्या..

भतीजा – तो अंकल, ये सरकार है कि शेयर मार्केट की दलाल…पार्टी है कि ब्रोकर??

अंकल – तुम अर्बन नक्सल हो क्या..

भतीजा – हो सकता है पर ये तो तय है कि आप भ्रष्ट भी थे, कामचोर भी रहे ही होंगे…निकम्मे भी

अंकल – क्या बक रहा है, ज़ुबान संभाल

भतीजा – क्यों अंकल, अपने लिए पूरी पेंशन, वेतन, वेतन आयोग, महंगाई भत्ता रख के, बाकी के लिए इसका उल्टा चाहना भी भ्रष्ट होना ही है..तिस पर ऐसी सरकार का समर्थन करना, जो शेयर मार्केट की ब्रोकर बन जाए..

अंकल – अबे तू साला देशद्रोही निकला..तेरी पूरी पीढ़ी ही ऐसी हो गई है..

भतीजा – अंकल, सरकारी नौकरी की सैलरी में 8 फ्लैट खरीदना, तमाम ज़मीनें खरीदना, बच्चों की करोड़ों में शादी करना..बिना घूस के तो नहीं आया होगा..देशद्रोही कौन है? आप ब्रिज कॉरपोरेशन में थे न? कितना सीमेंट, कितनी रेत? पूछेगा अंकल समय का प्रेत…

अंकल – मुझे पता है कि तू मुसलमानों से दोस्ती रखता है..

भतीजा – तो असल दिक्कत ये है..

अंकल – नहीं, मुझे क्या..

भतीजा – तो फिर? मोदी को भी इसीलिए वोट देते हैं न?

अंकल – हां, देते हैं इसलिए..इन मुल्लों ने देश बर्बाद कर दिया..

भतीजा – क्यों..आप जब घूस ले रहे थे, ट्रांसफर पोस्टिंग में पैसे खा रहे थे..तब देश बर्बाद नहीं हो रहा था..आपने तो फेसबुक पर लिखा था मुसलमान बस पंचर ही बना रहा है सत्तर साल से..तो वो कैसे देश बर्बाद कर रहा था..

अंकल – हां तो पढ़ाई लिखाई करता न…

भतीजा – और फिर आपकी तरह करप्शन करता..

अंकल – हां, तो बस हमने किया क्या? वो जो रिज़र्वेशन लेकर आए, वो तो दूध के धुले थे?

भतीजा – पर अंकल, उन्होंने तो आपसे सीखा..आप तो रिज़र्वेशन के पहले से कर रहे थे न…

अंकल – तुम लोग देश मिटा दोगे..मोदी विरोध में अंधे हो गए हो..अरे हिंदू विरोध-मोदी विरोध से देश खत्म हो जाएगा..

भतीजा – लेकिन अंकल आपका तो आज का Whatsapp स्टेटस था कि ये देश और धर्म सनातन है, सनातन काल से चल रहा है..किसी की हैसियत नहीं कि इसे मिटा दे…

अंकल – हैं, ये कब लिखा मैंने?

भतीजा – संस्कृत में था, आप मीनिंग नहीं समझ पाएं होंगे..संस्कृत देखी होगी तो चिपका दिया होगा..

अंकल – ये देशद्रोही, धर्म विरोधी मुझसे ऐसे बात कर रहा है और सब देख रहे हैं, इसको व्हॉट्सएप ग्रुप से निकालें वरना मैं छोड़ दूंगा…

(सब शांत रहते हैं..)

अंकल – अरे किसी को कोई फ़र्क नहीं पड़ रहा कि किसी देश के सम्मानित सीनियर सिटीज़न का अपमान किया जा रहा है..

भतीजा – अंकल, आपको कब पड़ा था? जब सोनिया गांधी के लिए अश्लील भाषा का इस्तेमाल किया गया? स्वामी अग्निवेश को सड़क पर पीटा गया? सीनियर सिटीज़न दादरी में ख़ुद लिंच हो गया या फिर अपने लिंच हुए बेटे की लाश पर खड़ा हो रहा था? जब गांधी को गाली दी जाती है? या आंबेडकर को..जब गौरी लंकेश, गोविंद पानसरे, दाभोलकर, कलबुर्गी को मार दिया गया..जब मणिपुर में सीनियर सिटीज़न्स का रेप हुआ..

अंकल – अरे पागल हो गया है, ये वामपंथियों की संगत में पड़ गया है…आप लोग झेलो ये सब, मैं जाता हूं

Uncle left the Group

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अंकल ने अभी 250 ग्राम ईसबगोल दूध में घोल कर पिया है, कमोड पर बैठे हैं..घुटनों पर हाथ रगड़ रहे हैं..12 बजे पेंशन ट्रांसफर का मैसेज भी आ ही जाएगा..

– मयंक

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