गौगुण्डों और सहारनपुर दलित हिंसा पर आंदोलन की रणनीति बना रहे राजनीतिक कार्यकर्ताओं पर माओवादी बता कर पुलिस की छापेमारी

पटना के यूथ हाॅस्टल में आयोजित बैठक में रिहाई मंच महासचिव राजीव यादव और न्यायमंच के संयोजक रिंकू यादव समेत दर्जनों नेता थे मौजूद
“नीतीश और योगी-मोदी में कोई फर्क नहीं”- रिहाई मंच
लखनऊ 25 मई 2017। रिहाई मंच ने पटना में राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की बैठक पर माओवाद के नाम पर पुलिस छापे को मुख्यमंत्री नीतीष कुमार द्वारा विरोधियों की आवाज दबाने की कोशिश बताया है। मंच ने कहा है कि ये छापेमारी साबित करती है कि नीतीश कुमार की सरकार भी मोदी की तरह अपने विरोधियों को निशाना बनाने के लिए पुलिस फोर्स का राजनीतिक इस्तेमाल कर रही है।
रिहाई मंच द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में प्रवक्ता शाहनवाज आलम ने कहा कि पटना के यूथ हाॅस्टल परिसर में आयोजित इस बैठक में रिहाई मंच के महासचिव राजीव यादव समेत पूरे बिहार और झारखंड से दर्जनों संगठनों के प्रतिनिधि षामिल थे जहां न्याय मंच के संयोजक रिंकू यादव के बुलावे पर सहारनपुर में दलितों पर हमले समेत पूरे देष में गौगुंडों द्वारा मुसलमानों पर जारी हमले और बिहार में व्याप्त भ्रष्टाचार के मुद्दे पर आंदोलन की रूपरेखा बनाई जा रही थी।
शाहनवाज आलम ने कहा कि यह महज इत्तेफाक नहीं है कि सहारनपुर दलित हिंसा के खिलाफ आंदोलन करने वालों पर योगी सरकार नक्सली बताकर मुकदमें लाद रही है तो वहीं नीतीष कुमार की पुलिस भी दलितों और अल्पसंख्यकों का सवाल उठाने वालांे पर माओवादी होने का आरोप लगाकर छापे मार रही है। उन्होंने कहा कि जन आंदोलनों को कुचलने की रणनीति बिल्कुल एक जैसी होना बताता है कि हिंदुत्व और कथित सामाजिक न्यायवादी सरकारों में दमन की रणनीति पर आमसहमति है।

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