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| 1936 के ओलंपिक में जादू करते ध्यानचंद |
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| दूसरे गोलमेज़ सम्मेलन में गांधीजी, सितंबर,1931 |
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| विंस्टन चर्चिल के साथ चार्ली चैप्लिन अक्सर गुफ्तगू करते थे |
उससे ठीक कुछ रात पहले चैप्लिन उन विंस्टन चर्चिल और उनके सहयोगियों से डिनर पर मिले थे जिन्हें गांधी फूटी आंख पसंद नहीं था। अधनंगा फकीर कहकर चर्चिल ने ही गांधी का अपमान करने की कोशिश की थी। चैप्लिन अपनी आत्मकथा में लिखते हैं कि- मैंने उन्हें बताया कि मैं गांधी जी से मिलने जा रहा हूं जो इन दिनों लंदन में हैं। “हमने इस व्यक्ति को बहुत झेल लिया है। ब्रैकेन ने कहा,”भूख हड़ताल हो या न हो, उन्हें चाहिये कि वे इन्हें जेल में ही रखें। नहीं तो ये बात पक्की है कि हम भारत को खो बैठेंगे।”“गांधी को जेल में डालना सबसे आसान हल होगा, अगर ये हर काम करे तो ” मैंने टोका, “लेकिन अगर आप एक गांधी को जेल में डालते हैं तो दूसरा गांधी उठ खड़ा होगा और जब तक उन्हें वह मिल नहीं जाता जो वे चाहते हैं वे एक गांधी के बाद दूसरा गांधी पैदा करते रहेंगे।” चर्चिल मेरी तरफ मुड़े और मुस्कुराये,”आप तो अच्छे खासे लेबर सदस्य बन सकते हैं।” ये चर्चिल का तंज था। चर्चिल का ज़िक्र चला है तो लिखता चलूं कि वो भारत पर राज करना इतना ज़रूरी समझते थे कि अप्रैल 1931 में कहा था – The loss of India will be the death blow of the British Empire। गलत नहीं थे चर्चिल। बहरहाल, इस मुलाकात के बाद चार्ली चैप्लिन को गांधी से मिलना था।



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