ये कोल्ड बल्डेड मर्डर है. सोचा समझ कर की गई हत्या.

बीजेपी का एक केंद्रीय मंत्री बंदारू दत्तात्रेय, दूसरी केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को ऑफिशियल चिट्ठी लिखता है कि आंबेडकर स्टूडेंट्स एसोसिएशन पर कार्रवाई कीजिए. इस पर कार्रवाई होती है. स्मृति ईरानी के निर्देश पर वाइस चांसलर पांच छात्रों के सामाजिक बहिष्कार का नोटिस जारी करके है. जबकि इससे पहले यूनिवर्सिटी की प्रोक्टोरियल जांच में ये छात्र निर्दोष सिद्ध हो चुके हैं. दत्तात्रेय ईरानी से शिकायत करते हैं कि यूनिवर्सिटी नरमी बरत रही है.
दो आरोप है. आप दत्तात्रेय का पत्र देखें. फांसी पर ग्लोबल बहस में जब इस देश के कई जज, प्रोफेसर, मानवाधिकार कार्यकर्ता हिस्सा ले रहे हैं, तब कैंपस में इसपर सेमिनार करना अपराध बताया गया है. एबीवीपी के जिस छात्र ने मारपीट का आरोप लगाया था, वह खुद यूनिवर्सिटी को लिखकर माफी मांग चुका है. सामाजिक बहिष्कार अपने आप में क्रूरता है. दलितों को यह सजा देने के और भी मायने हैं.

यह कोल्ड ब्लड मर्डर है. सोच समझकर की गई हत्या. रोहित वेमुला की हत्या की गई है.
हम सब गुनाहगार हैं.
रोहित वेमुला की हत्या बेशक आधुनिक युग के द्रोणाचार्यों यानी प्रोफेसरों ने की है, लेकिन उसके खून के छींटे हम सबके बदन पर हैं.
हम तो जानते थे कि RSS ने हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी में आंबेडकर स्टूडेंट्स एसोसिएशन के पांच छात्रों का सामाजिक बहिष्कार सुनिश्चित कराया है. हॉस्टल से निकाले गए ये बच्चे खुले में रातें बिता रहे थे. उन पर तमाम तरह की पाबंदियां लगी थी. उनका करियर तबाह हो रहा था. परिवार से कितने तरह के दबाव आ रहे होंगे.
हम और आप, जी हां आप भी, और हम भी, यह सब बातें जान रहे थे. पर हम रोहित को कहां बचा पाए?
हम तो इंसानियत और न्याय के पक्ष में थे…. फिर हम क्यों हार गए रोहित?
एकलव्य यह देश शर्मिंदा है
द्रोणाचार्य अब तक जिंदा है!
ये सचमुच ज्ञान के मंदिर हैं, जहां दरवाजे पर पुजारी मतलब कि प्रोफेसर लट्ठ और चाकू लेकर खड़ा है. उस पर खून सवार है.
संवैधानिक रिजर्वेशन की वजह से इनके मंदिरों में SC, ST, OBC के स्टूडेंट्स की संख्या लगभग 50% हो गई है. लेकिन फैकल्टी यानी शिक्षक अभी वही हैं. उनकी सामाजिक संरचना कम बदली है.
उनका मंदिर शूद्रों और अतिशूद्रों के प्रवेश से अशुद्ध हुआ जा रहा है.

वे हिंसक हो गए हैं. वे खूंखार हैं. वे इंटरव्यू यानी वाइवा में उन्हें फेल कर सकते हैं. IIT रुड़की की तरह उन्हें निकाल बाहर कर सकते हैं. वे उन्हें क्लास में अपमानित या उपेक्षित कर सकते हैं. वे किसी का प्लेसमेंट खराब कर सकते हैं. वे बेहद हिंसक हैं. वे एकलव्यों का सामाजिक बहिष्कार कर सकते हैं. वे रोहित की जान ले सकते हैं.
बच्चों को बचाओ.
हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी के रिसर्च स्कॉलर रोहित वेमुला की सांस्थानिक हत्या का जिन्हें दुख या नाराजगी नहीं है, अगर कोई व्यक्ति ऐसे शोक के क्षणों में भी जाति, धर्म और संस्कृति या नस्ल के बंधनों से ऊपर उठकर सबके साथ मिलकर दुखी नहीं हो सकता, तो मान लीजिए कि वह देश का नागरिक नहीं, किसी कबीले का सदस्य मात्र है. उनका इंसान होना भी शक के दायरे मे है.
क्या आपको अपने आस पास ऐसे लोग नजर आते हैं?