मोदी और उनके उद्योगपति महंगे सूट न सिलवा कर गुलबर्ग सोसाइटी की मदद कर दें ! सेवा भाव कहाँ गया? – समीर होशियारपुरी

Modi suit 2

तीस्ता सेतलवाड़ जी ने कोशिश की, दंगा पीड़ितों की मदद करनी चाही. जो कुछ भी उनके वश में था उन्होंने किया. मोदी के इशारे पर एहसान जाफ़री के साथ गुलबर्ग सोसाइटी जला दी गई थी. जो पीड़ित बचे थे वे आज तक अलग अलग जगह पर रह रहे हैं. २००७ में पीड़ितों ने सोचा था कि अपने अपने घर बेच डालें, परन्तु कोई अच्छा खरीददार नहीं मिल रहा था. लोग उल्टा पीड़ितों की दुर्दशा का फायदा उठाने के लिए कौड़ी के भाव पूरी गुलबर्ग सोसाइटी खरीदना चाहते थे.

ऐसे में सोसाइटी के कुछ सदस्यों ने तीस्ता सेतालवाड़ जी के साथ मिलकर एक विकल्प ढूँढा. तीस्ता जी की संस्था (जो अनेक केसों में मोदी के मंत्री तक को जेल भिजवा चुकी है) ने सोचा कि गुलबर्ग सोसाइटी का सही मोल पता कर के, चंदा इकठ्ठा किया जाए और पीड़ितों को वाजिब भाव देने के बाद, उस सोसाइटी को गुजरात के पीड़ितों को समर्पित स्मारक बना दिया जाय. उस समय न किसी मीडिया ने, न गुजरात सरकार ने, न अडानी ने, न अम्बानी ने, न मोदी ने, न आज तीस्ता पर केस करवाने वालों ने पीड़ितों के लिए कुछ किया. अलग अलग कोर्ट में केस को सबसे अधिक महत्त्व देते हुए, बचे हुए समय में पीड़ितों के स्मारक के लिए चंदा इकठ्ठा किया गया, परन्तु केवल चार लाख साठ हज़ार रूपये जमा हो सके.

अंततः गुलबर्ग सोसाइटी ने समाज की बेरुखी देखते हुए ये फैसला ले लिया कि अब सभी सदस्य अपने अपने तरह से अपने मकान बेच दें, क्योंकि स्मारक के नाम पर उस प्रॉपर्टी का १% धन भी नहीं जमा हो पाया है. स्मारक के नाम पर आया हुआ चार लाख साठ हज़ार रुपया आज भी वैसे ही अकाउंट में रखा हुआ है. आज भी अगर मीडिया वाले चाहें तो गुलबर्ग सोसाइटी के लिए चंदा इकठ्ठा कर के उनके घर सही भाव में खरीद सकते हैं. वहां स्मारक बना सकते हैं. या मोदी और उनके उद्योगपति चाहें तो अपने महंगे सूट न सिलवा कर उस पैसे से गुलबर्ग सोसाइटी और हज़ारों दूसरी दंगा पीड़ित सोसाइटी की सहायता कर दें. ये अजीब बात है, कि तीस्ता सेतलवाड कोर्ट केस भी संभाले, लोगों को आश्रय भी दे, नौकरी भी दे और मीडिया तथा मोदी बैठ कर ये देखते रहे कि कहाँ चूक हो गई !!! कहाँ है मीडिया और मोदी, हिसाब क्यों नहीं देते कि आजतक इन्साफ क्यों नहीं मिला है गुजरात के पीड़ितों को? कहाँ है मीडिया और मोदी जब उच्चतम न्यायलय के कहने के बाद भी आजतक लोगों को मुआवजा नहीं दिया गया, तोड़े गए स्थलों को भी बनवाने की बात मोदी सरकार ने नहीं मानी…

परन्तु आ गए दंगा पीड़ितों की बेबसी का फायेदा उठाने और उनपर केस करने जो इन्साफ के लिए लड़ रहे हैं. सरकार के पास हजारों करोड़ हैं मूर्ती बनवाने के लिए, परन्तु दंगा करवाने के बाद पीड़ितों के लिए एक पैसा भी नहीं है !!! धिक्कार है ऐसी सरकार पर !!!

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