मोदी सरकार और गुजरात पुलिस जानी-मानी एक्टिविस्ट तीस्ता सीतलवाड़, जावेद आनंद और गुजरात दंगे के तीन पीड़ितों को किसी तरह झूठे मामलों में फंसाना चाहती है। मोदी सरकार और गुजरात पुलिस की इस कार्रवाई ने हमें गुस्से से भर दिया है। हम शॉक्ड हैं क्योंकि इंसाफ को दफ़्न करने की फिर एक कोशिश की जा रही है।
मरहूम एहसान ज़ाफरी की बीवी ज़किया जाफ़री की अपील फिलहाल गुजरात हाईकोर्ट में है। तब गुजरात के चीफ मिनिस्टर रहे नरेंद्र मोदी समेत 59 लोगों पर मास मर्डर समेत कई गंभीर अपराध की साजिश का आरोप इस अपील में लगाया गया है। इनमें बड़ी सियासी हस्तियां, नौकरशाह भी शामिल हैं। यह बात इस लिहाज़ से भी बेहद अहम है कि सुप्रीम कोर्ट की तरफ से नियुक्त किए गए एमिकस क्यूरी राजू रामचंद्रन ने भी कोर्ट को बताया था कि इस मामले में नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ केस चलाने के लिए पर्याप्त सुबूत हैं।
गुजरात दंगों के पीड़ितों और बचे हुए लोगों के संघर्ष को आवाज़ देने के लिए सिटिजन फॉर जस्टिस एंड पीस (सीजेपी) वजूद में आया। सीजेपी ने इस संघर्ष में कई बड़ी लड़ाइयां जीतीं हैं। तीस्ता सीतलवाड और जावेद आनंद इसके संस्थापक सदस्य हैं। इसीलिए इनपर ख़ासतौर से हमले किए जा रहे हैं। गुलबर्ग हाउसिंग सोसायटी, अहमदाबाद के तीन सदस्यों के ख़िलाफ दर्ज कथित ‘चीटिंग’ का मुक़दमा भी इतना ही शर्मनाक और निंदनीय है। इनमें से सभी की फैमिली के कई लोगों की जानें वक़्त गईं जब 27 फरवरी 2002 को हिंसक भीड़ ने इनकी कॉलोनी पर हमला कर दिया और पुलिस तमाशबनी बनी रही। मरने वालों में तनवीर ज़ाफरी के पिता और कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान ज़ाफरी भी शामिल हैं जिन्हें दंगाइयों ने 68 लोगों के साथ मार दिया था। कोर्ट में दाख़िल हलफ़नामों पर तीस्ता और दूसरे लोगों जवाब दिया है। इसमें गुजरात पुलिस झूठ फैलाने का आरोप भी शामिल है।
हम कानून में यक़ीन करने वाले ज़िम्मेदार नागरिक हैं। बदले की भावना से की जा ही मोदी सरकार और गुजरात पुलिस की कार्रवाई की हम सख़्त निंदा करते हैं। हमारी मांग है कि तीस्ता, जावेद, तनवीर ज़ाफरी और गुलबर्ग सोसायटी के दूसरे पदाधिकारियों के ख़िलाफ दर्ज बेसलेस एफआईआर फ़ौरन वापस ली जाए।
- प्रफेसर दीपक मलिक, निदेशक, गांधी अध्ययन केंद्र
- काशीनाथ सिंह, मशहूर कहानीकार
- वीएन राय, पूर्व डीजीपी, यूपी
- प्रफेसर रूपरेखा वर्मा, पूर्व वीसी लखनऊ
- प्रफेसर चौथीराम यादव, हिंदी विभाग, बीएचयू
- संत विवेकदास, महंत कबीर मठ
- प्रफेसर वसंथी रमन, CWDS
- संदीप पाडेंय, रोमन मैग्सेसे पुरस्कार विजेता
- प्रफेसर कमरजहां, पूर्व अध्यक्ष, उर्दू डिपार्टमेंट, बीएचयू
- स्वाति, समाजवादी जन परिषद
- नीति भाई, महासचिव, लोक चेतना समिति
- फादर आनंद, निदेशक, विश्व ज्योति संचार केंद्र
- आनंद दीपायन, बीएचयू
- संजय श्रीवास्तव, महासचिव, प्रगतिशील लेखकर संघ ट
- हाजी इश्तियाक़, महासचिव, सर सईद सोसायटी
- फादर चंद्रकांत, निदेशक, मैत्रयी भवन
- वल्लभचार्य पांडे, आशा ट्रस्ट
- एसएम यासीन, जॉइंट सेक्रेटरी, अंजुमन-ए-इंतज़ामिया मसाजिद
- डॉक्टर लेनिन रघुवंशी, निदेशक पीवीसीएचआर
- नीता चौबे, समाजवादी जन परिषद
- नंदलाल मास्टर, लोक समिति
- मेंहदी बख़्त, प्रिंसिपल, बीबीएस
- श्रुति नागवंशी, सेक्रेटरी, सावित्री बाई फूले संगठन
- वीरेंद्र यादव, ज़िला कोऑर्डिनेटर, आईपीएफ
- डॉक्टर मुनीज़ा आर. ख़ान, एक्ट रजिस्ट्रार, जीआईएस