त्रिलोकपुरी हिंसा: दबे पांव दाख़िल हो रहा है दंगा

त्रिलोकपुरी इलाके में सांप्रदायिक तनाव के बाद बजरंग दल जैसे संगठन एक्टिव हो गए हैं। इन्होंने दिल्ली के एलजी नजीब जंग को चिट्ठी लिखकर कहा है कि जिहादी मानसिकता वाले मंदिरों पर हमला कर रहे हैं। अपराधियों की फौरन इनकी गिरफ्तारी होनी चाहिए। इस चिट्ठी के ज़रिए बजरंग दल यह मैसेज देने की कोशिश कर रहा है कि वाक़ई मंदिरों पर हमले किए जा रहे हैं। लेकिन मज़े की बात है कि ये कथित हमले देश में बीजेपी की सत्ता और असर बढ़ने के बाद देखने को मिल रहा है। मौके पर कई घंटे गुज़़ारने के बाद मुझे आप एमएलए राजू धिंगान नदारद दिखे और मुझे संदेह है कि हालात का जायज़ा लेने मनीष सिसौदिया भी पहुंचे होंगे।

ब्लॉक नंबर 28 के मुहाने पर बैठी बिमल।
ब्लॉक नंबर 28 के मुहाने पर बैठी बिमल।

मयूर विहार से सटा त्रिलोकपुरी दिल्ली की मिली-जुली आबादी वाला इलाका है। सांप्रदायिक तनाव की चपेट में आने से पहले यह इलाका बीते साल असेंबली इलेक्शन के वक्त सुर्ख़ियों मेंआया था जब यहां के बाशिदों ने आम आदमी पार्टी के टिकट पर खड़े हुए राजू धिंगान को जीत का सेहरा पहनाया। खेल गांव में चल रही वोटों की गिनती के वक्त राजू वहां मौजूद थे और बीजेपी उम्मीदवार सुनील कुमार को तकरीबन 20 हजार वोटों से शिकस्त देने के बाद अपना काफिला लेकर त्रिलोकपुरी पहुंचे यहां सर्मथकों ने राजू को अपने कंधे पर बिठाकर घुमाया था।राजू दलित हैं और सीआईएसएफ की नौकरी छोड़कर राजनीति में बदलाव के लिए दाखिल हुए थे। पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने रामलीला मैदान में अपने शपथग्रहण के दौरान सभीविधायकों और वहां मौजूद हजारों समर्थकों के साथ एक गीत गुनगुनाया था- इंसान का हो इंसान से भाईचारा, यही पैगाम हमारा। लेकिन यह पैगाम कहीं बीच में अटका पड़ा है। त्रिलोकपुरी की शांति को किसी की नजर लग गई है और यह सांप्रदायिक हिंसा की चपेट में आ गया। इससे पहले इसी साल केंद्र में नई सरकार बनने के बाद में दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में सांप्रदायिक तनाव के कई मामले हुए। कई अनरजिस्टर्ड हैं।

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यह भूमिका इसलिए जरूरी थी क्योंकि त्रिलोकपुरी में सांप्रदायिक हिंसा अचानक नहीं हुई है। इसे टाला जा सकता था सियासी नुमाइंदों के इंटरफेयरेंस से, लेकिन अब यहां नफ़रत की देग चढ़ चुकी है। हिंदू-मुसलमानों की बीच पनपा बैर आगे और भी भयानक होने के पूरे आसार हैं। जाहिर है इसके लिए एमएलए राजू और उनकी पार्टी जवाबदेह है। त्रिलोकपुरी से ही सटी हुई पटपड़गंज असेंबली सीट है जहां से पार्टी में नंबर-2 की हैसियत वाले नेता मनीष सिसौदिया एमएलए हैं। मौके पर कई घंटे गुज़़ारने के बाद मुझे राजू धिंगान नदारद दिखे और मुझे संदेह है कि हालात का जायज़ा लेने मनीष सिसौदिया भी पहुंचे होंगे।

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हिंसा की वजह मामूली है लेकिन इसके बाद फैली अफवाह सैकड़ों लोगों को अपना शिकार बना चुकी है। दोनों कम्युनिटी से 60 लोगों की गिरफ्तारी हुई है और दर्जनों घायल हैं। कामकाज पूरीतरह ठप है। दुकानें बंद हैं और कुछ में लूटपाट हुई हैा गलियों में ईंट और शराब की बोतलों के टुकड़े फैले हैं। छतों पर ईंट इकट्ठा हैं और दहशत के मारे लोग घरों में दुबके हैं। खासकर मुसलमान जो मौका मिलते ही घर छोड़कर अपने रिश्तेदारों के घर पहुंच रहे हैं। प्रभावित हिस्सों में ब्लॉक नंबर 15, 16, 20, 26, 27, 28, 35, 36 हैं। झगड़ा ब्लॉक नंबर 20 से शुरू हुआ।

नवरात्र के मौके पर ब्लॉक संख्या 20 के हनुमान चौक पर दुर्गा की मूर्ति एक टेंपररी पंडाल में बिठाई गई और यही से हिंदूओं-मुसलमानों में टकराव शुरू हुआ। आबादी के लिहाज से ब्लॉक नंबर 20 में मुसलमानों की तादाद ज्यादा है। इस ब्लॉक में रहने वाले मोहम्मद अबरार के मुताबिक 38 सालों में पहली बार यहां पंडाल लगाया गया है। हमें इसपर कोई आपत्ति नहीं है लेकिन तनाव की वजह से मैं और मेरा परिवार दहशत में है। पंडाल जहां बिठाया गया है, ब्लॉक के लोग वहां अभी तक कूड़ा फेंका करते थे। मोहल्ले के लड़के इसी चौक पर खड़े होकर शराब भी पिया करते थे लेकिन पंडाल लगाने के इरादे से चौक की सफाई की गई और शराब पीने से मना किया जाने लगा।

दिवाली की शाम 7 बजे आरती के दौरान भी यहां कुछ लड़के शराब पी रहे थे, फिर इन्हीं लड़कों के बीच झगड़ा होने पर अफवाहों का बाज़ार गर्म कर दिया गया क्योंकि झगड़ने वाले लड़के अलग-अलग मज़हब के थे। सांप्रदायिक हिंसा के लिए इतना काफ़ी था। इसके बाद त्रिलोकपुरी की आबोहवा में तरह-तरह की कहानियां तैरने लगीं। मसलन- मुसलमानों ने पंडाल हटाने की कोशिश की,  मूर्ति नाली में फेंक दी, उसपर पेशाब कर दिया, दानपत्र लूटकर भाग गए वगैरह-वगैरह। इन अफवाहों की वजह से महज दो घंटे के भीतर इलाके के कई ब्लॉक्स में पत्थरबाज़ी शुरू हो गई। हालात काबू करने मौके पर पहुंची त्रिलोकपुरी पुलिस के एडिशनल एसएचओ समेत दो पुलिसवाले इंजर्ड भी हुए। अगली सुबह यानी 25 अक्टूबर को इंजर्ड होने वालों की तादाद14 हो गई जिसमें 13 पुलिसवाले हैं। हालांकि यह सरकारी आंकड़ा है। घालयों की तादाद ज़्यादा है। पूरा इलाका छावनी में तब्दील है। डिस्ट्रिक्ट पुलिस के आला अफसर इलाके में कैंप किएहुए हैं। गलियों में पुलिस का मार्च जारी है। ब्लॉक नंबर 20 में दुर्गा का पंडाल सुरक्षित है। तनाव के बाद पंडाल की सजावट में इज़ाफा कर दिया गया है और आरती में जुटने वाली भीड़ भी बढ़ गई है।

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दोनों कम्युनिटी के ज़्यादातर लोग हिंसा की सही वजह नहीं जानते, लेकिन पत्थरबाज़़ी में शामिल हैं। कुछ अपनी-अपनी गलियों में बैठकर यह तमाशा ख़त्म होने के इंतज़ार में हैं ताकि वेकाम पर लौट सकें। पुलिस का कहना है कि कई दिन लगातार छुट्टी होने की वजह से पथराव बार-बार हो रहा है। मंडे तक हालात नॉर्मल हो जाएंगे।

इन इलाकों में घूमते हुए मैं ब्लॉक नंबर 28 के मुहाने पर पहुंचा। सारी दुकानें बंद थीं और सड़क ईंट और कांच की बोतलों से अटी पड़ी थी। यहां एक दुकान की शटर से पीठ सटाए एक अधेड़उम्र की औरत बैठी मिली। हुलिया पागलों जैसा, उलझे बाल, मैली शक्ल, ढली सूरत और सूखे होंठ। शक्ल से भूखी जान पड़ती थीं, उन्हें प्यास भी लगी थी। घंटों से बंद दुकानों ने उनकी भूख-प्यास बढ़ा दी थी। मुझे देखतते ही छत की तरफ इशारा करती हुई बोलीं कि ज़रा ऊपर से किसी को बुला दो। वह कुछ खाने के लिए मांग रही थी। उन्होंने  अपना नाम बिमल बताया।मैंने पूछा कि ये सब क्या हो रहा है? बोली सब काम पर हैं। जाने यह कौन-सा काम है, उनका ख़ुदा बेहतर जाने। मैं आगे बढ़ गया जहां एक भीड़ गुस्से और बदले की आग में तप रही थी। बजरंग दल जैसे हिंदूवादी संगठन एक्टिव हो गए हैं। इन्होंने दिल्ली के एलजी नजीब जंग को चिट्ठी लिखकर कहा है कि जिहादी मानसिकता वाले मंदिरों पर हमला कर रहे हैं। अपराधियों की फौरन इनकी गिरफ्तारी होनी चाहिए। इस चिट्ठी के ज़रिए बजरंग दल यह मैसेज देने की कोशिश कर रहा है कि वाक़ई मंदिरों पर हमले किए जा रहे हैं। लेकिन मज़े की बात है कि ये कथित हमले देश में बीजेपी की सत्ता और असर बढ़ने के बाद देखने को मिल रहा है।

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