गांधी और अम्बेडकर के राजनैतिक अर्थशास्त्रीय विचारों का सख्ती से अनुकरण लगभग वाम मार्गी – पी साईनाथ।
21-09-2014
प्रसिद्ध ग्रामीण पत्रकार, द हिंदू समाचार पत्र के 31 जुलाई, 2014 तक ग्रामीण मामलों के सम्पादक और अपनी पुस्तक ‘एवरीबडी लव्स अ गुड ड्रॉट’के लिए अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त; 2007 में मैग्सेसे पुरस्कार पाने वाले पी साईनाथ ने सामाजिक कार्यकर्त्री और पत्रकार तीस्ता सीतलवाड़ से भारत के एक देश के रूप में अपने निर्धन नागरिकों के भोजन, कपड़ों और स्वास्थ्य पर खर्च में कटौती के बरअक्स दी जा रही भारी भरकम कारपोरेट सब्सिडी पर बात की। भारतीय राजनीति के आदर्शों के संकुचित होते जाने और मीडिया में गरीबों की आवाज़ के लिए जगह कम होते जाने के फलस्वरूप स्वतंत्र विचारों के लिए विकल्प की आवश्यक्ता है। वह विकल्प कहां और कैसे उपजेगा, यह हम सबके लिए एक यक्ष प्रश्न है, यह पी साईनाथ ने 14 भागों में उपलब्ध इस वीडियो साक्षात्कार में बिल्कुल बेबाकी से कहा है। इस साक्षात्कार की अहम बातें;
कारपोरेट सब्सिडी: 2013-14 में 5 लाख 71 हज़ार करोड़ रुपए की भारी भरकम कारपोरेट सब्सिडी एक चिंताजनक प्रवृत्ति के बढ़ने की ओर इशारा करती है। यह वार्षिक बजट में उल्लिखित है लेकिन इसके बारे में शायद ही भारतीय मीडिया और विशेषकर दक्षिणपंथी अर्थशास्त्रियों ने चर्चा की हो, जो अमूमन भारी और अनर्गल सब्सिडी के लिए विलाप करते रहे हैं। इस प्रत्यक्ष सब्सिडी में 71 हज़ार करोड़ रुपए प्रत्यक्ष करों में छूट है, जो मनरेगा पर इस साल के बजट में व्यय की दोगुना राशि है। (सीतलवाड़ से साईनाथ)
यदि सम्पूर्ण सब्सिडी में 40 हज़ार करोड़ रुपए की व्यक्तिगत कर छूट को निकाल भी दें तो भी ये छूट स्तब्ध कर देने वाली हैं, जिसमें सोने और आभूषणों पर कस्टम ड्यूटी में छूट भी है, जिसका योग है 46 हज़ार करोड़ रुपए! 2005 -06 से अब तक कारपोरेट छूटों का कुल योग 36.5 लाख करोड़ रुपए है, जिससे मनरेगा को 105 सालों तक चलाया जा सकता है और पीडीएस (सार्वजनिक वितरण प्रणाली) को 31 साल तक नियोजित किया जा सकता है। 2005-06 की तुलना में 2013-14 की सब्सिडी में 132 फीसदी की बढ़ोत्तरी है। कारपोर्ट कर्ज़ माफ़ी एक बढ़ता उद्योग है वो भी दक्षता से।
This interview is the second of the series of audio-visual interviews, launched on 6.9.2014 available for viewing on the internet on the joint You Tube video channel by Communalism Combat (www.sabrang.com) and www.hillele.org.
6 सितम्बर 2014 को आरम्भ कॉम्बेट कम्युनलिज़्म (www.sabrang.com) और हिल्ले ले (www.hillele.org) के यू ट्यूब चैनल पर प्रसारित साक्षात्कारों की श्रृंखला का ये दूसरा साक्षात्कार है।
बड़े उद्योगपतियों, संसद और मीडिया के बीच साझा हित :इस साक्षात्कार में भारतीय संसदीय व्यवस्था पर लखपति ही नहीं करोड़पति सांसदों और उनके व्यापारिक हितों के बढ़ते प्रभाव पर भी खुलासा होता है। 2014 में 2009 के मात्र 145 10 लाख से अधिक सम्पत्ति वाले सांसदों की तुलना में 2014 में ऐसे सांसदों की संख्या 353 है और ज़ाहिर है कि कारपोरेट हितों का संसद में बढ़ना, उनके मीडिया में प्रभाव और दबाव से सीधे जुड़ा भी है। यही वजह रही कि नरेंद्र मोदी को 2014 में सत्ता तक पहुंचाने के लिए कारपोरेट धन और शक्ति के प्रयोग जैसा कोई उदाहरण आज तक देखने को नहीं मिला।
श्रमजीवी पत्रकार अधिनियम: भारत के स्वतंत्र प्रेस आयोगों के वृहत कार्यों में इस ख़तरो को काफी पहले ही देख लिया गया था, इसीलिए अब पत्रकारों के लिए नौकरियां सुरक्षित करने का समय है (श्रमजीवी पत्रकार अधिनियम), जिसे अनुबंध प्रणाली द्वारा विस्थापित कर दिया गया है। ठीक ग़ैर संगठित क्षेत्रों में कार्यरत श्रमिकों की तरह पत्रकारों को भी अनबंधित रोज़गार के ज़रिए आदर्शों की पत्रकारिता की जगह शोषण के मार्ग पर धकेला जा रहा है। इसलिए ये बेहद ज़रूरी है कि श्रमजीवी पत्रकार अधिनियम को सख्ती से लागू करवाया जाए।
PARI [People’s Archive for Rural India] परी (पीपुल्स आर्काइल फॉर रूरल इंडिया) : पी साईनाथ ने अपने इस अनोखे प्रोजेक्ट की भी इस साक्षात्कार में घोषणा की, जो प्रिंट, ऑडियो और वीडियो सभी रूपों में आम भारतीय की रोज़मर्रा की कहानियां कहेगा। साईनाथ बताते हैं कि कैसे वो और उनकी टीम देश की 78 विभिन्न भाषा और बोलियों में शहर के इंटरनेट उपभोक्ताओं तक साधारण भारत के श्रमिकों-कामगारों के उस योगदान को पहुंचाएंगे, जो उनके चमकते शहरों और विकास की नींव बनकर असाधारण श्रम कर रहा है।
पी साईनाथ वीडियो साक्षात्कार के लिए लिंक देंखें
P. Sainath Corporate Subsidies
Part I
https://www.youtube.com/watch?v=T5oW4eAl3Lk&list=UU3G7YYiSQ65t2AilCtw-anw
P. Sainath on Ruling Elite
Part II
https://www.youtube.com/watch?v=A8LIwdkxJRk&index=1&list=UU3G7YYiSQ65t2AilCtw-anw
P. Sainath on Convergance of Media, Business and Politics
Part III
https://www.youtube.com/watch?v=dUKIxl6r7yc&feature=youtu.be
P. Sainath on Corporate Media
Part IV
https://www.youtube.com/watch?v=oUttt4_HjPs&feature=youtu.be
P. Sainath on Media’s Private Treaties
Part V
https://www.youtube.com/watch?v=YlcJigJ7nXU&feature=youtu.be
P.Sainath on 2014 Elections
Part VI
https://www.youtube.com/watch?v=-i8-TAHCIfs&feature=youtu.be
P.Sainath on Media Alternatives
Part VII
https://www.youtube.com/watch?v=B8IjC7lifek&index=8&list=UU3G7YYiSQ65t2AilCtw-anw
P.Sainath on the Idealist Journalist
Part VIII
https://www.youtube.com/watch?v=kynnYRz6dJU&index=7&list=UU3G7YYiSQ65t2AilCtw-anw
P.Sainath on Paid News
Part IX
https://www.youtube.com/watch?v=dnneuU4os-w&list=UU3G7YYiSQ65t2AilCtw-anw&index=5
P.Sainath on Contract Journalism
Part X
https://www.youtube.com/watch?v=xB7fTUOZQvs&index=2&list=UU3G7YYiSQ65t2AilCtw-anw
P.Sainath on Public Action and the Media
Part XI
https://www.youtube.com/watch?v=xB7fTUOZQvs&index=2&list=UU3G7YYiSQ65t2AilCtw-anw
P.Sainath on New Project [PARI-People’s Archive for Rural India]
Part XII
https://www.youtube.com/watch?v=w1N7Kbb1EVs&index=3&list=UU3G7YYiSQ65t2AilCtw-anw
P.Sainath on the Hard Economic Rightwing
Part XIII
https://www.youtube.com/watch?v=VnxHUhOj21k&list=UU3G7YYiSQ65t2AilCtw-anw&index=4
P.Sainath on the Internet and the Media
Part XIV
https://www.youtube.com/watch?v=p5WrTsyTW6U&list=UU3G7YYiSQ65t2AilCtw-anw&index=6
(Hillele Combat Bureau)
