अभी-अभी
बरसात के तेज-बहुत तेज होते ही
बेटा भीगने भागा
बिल्कुल अनुराधा पर गया है.
चेजिंग द मानसून
नाम की किताब पढ़ने के बाद
अनुराधा ने कहा-चेज क्यों करेंगे
पीछा क्यों करें
चलो, ऐसा करते हैं कि
मानसून के आगे-आगे भागते हैं.
एक दिन में मानसून अगर 75 किमी जाता है
जो शायद जाता है,
तो हम हर दिन 100 किमी जाएंगे
और हर सुबह बरसात का इंतजार करेंगे.
इस तरह हमने एक बार
कन्याकुमारी से पूरा केरल लांघकर
कर्नाटक में मैंगलोर तक का सफर किया.
ज्यादातर दिनों में
हर सुबह पहली बरसात का हमने
इस तरह स्वागत किया.
