One thought on “Poetry Sucks, We have gone too far. Ah! It Rhymes with Modi Sarkaar!”
this reminds me a story
दो दोस्त थे ..एक का नाम था सगाई और दुसरे का बारात….जरा शायराना मिजाज़ के थे……मिसरे और मतले में बात करने की उनकी आदत थी और उनमे हमेशा होड़ लगी थी कि किसकी तुकबंदी ज्यादा जमती है… एक दिन दोनों में लड़ाई हो गयी तो सगाई ने अपनी लय बरक़रार रखते हुए कहा ” बारात रे बारात तेरे सर खाट ” तो जवाब में बारात नें कहा ” सगाई रे सगाई तेरे सर पर चक्की ” . बारात बोला “चक्की” इस तुकबंदी में कुछ जमी नहीं…… सगाई ने पलट के जवाब दिया तुकबंदी जमे या ना जमे चक्की सर पर पड़ेगी तो बोझ तो पड़ेगा…….. इसी तरह मोदीकापहला मिसरा कुछ भी हो दुसरे मिसरे का काफिया ” चक्की ” की तरह “अबकी बार मोदी सरकार
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दो दोस्त थे ..एक का नाम था सगाई और दुसरे का बारात….जरा शायराना मिजाज़ के थे……मिसरे और मतले में बात करने की उनकी आदत थी और उनमे हमेशा होड़ लगी थी कि किसकी तुकबंदी ज्यादा जमती है… एक दिन दोनों में लड़ाई हो गयी तो सगाई ने अपनी लय बरक़रार रखते हुए कहा ” बारात रे बारात तेरे सर खाट ” तो जवाब में बारात नें कहा ” सगाई रे सगाई तेरे सर पर चक्की ” . बारात बोला “चक्की” इस तुकबंदी में कुछ जमी नहीं…… सगाई ने पलट के जवाब दिया तुकबंदी जमे या ना जमे चक्की सर पर पड़ेगी तो बोझ तो पड़ेगा…….. इसी तरह मोदीकापहला मिसरा कुछ भी हो दुसरे मिसरे का काफिया ” चक्की ” की तरह “अबकी बार मोदी सरकार